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लद्दाख में गूंजा ‘बुद्धं शरणं गच्छामि’! अमित शाह ने किया बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन

Ladakh Buddha Relics Exhibition 2026: केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख आज आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लेह के जीवात्सल में तथागत बुद्ध के पवित्र अवशेषों (Relics) की प्रदर्शनी का भव्य उद्घाटन किया. लद्दाख के दुर्गम पहाड़ों के बीच आयोजित इस समारोह में न केवल हजारों श्रद्धालु पहुँचे बल्कि भारत की प्राचीन सभ्यता और भगवान बुद्ध की शांति की शिक्षाओं को भी एक वैश्विक मंच मिला. इस अवसर पर लद्दाख के उपराज्यपाल और कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे.

20 हज़ार श्रद्धालुओं का हुजूम क्यों?

प्रदर्शनी के पहले ही दिन लेह में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा. लगभग 20 हज़ार लोगों ने इस उद्घाटन समारोह में हिस्सा लिया. सभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि लद्दाख की यह पवित्र धरती केवल सीमा का प्रहरी नहीं है, बल्कि यहाँ से निकलने वाला शांति और करुणा का संदेश दुनिया भर के साधकों के जीवन को रोशन कर रहा है. उन्होंने इन अवशेषों को भगवान बुद्ध की जीवंत आध्यात्मिक उपस्थिति का प्रतीक बताया.

‘लोकल फॉर वोकल’ की झलक(Amit Shah Ladakh visit)

यह कार्यक्रम केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसमें लद्दाख की संस्कृति और उद्यमिता की भी झलक दिखी. स्थानीय छोटे उद्यमियों ने लकड़ी की नक्काशी, पारंपरिक बर्तनों, आयुर्वेदिक दवाओं और लद्दाखी व्यंजनों के स्टॉल लगाए. तथागत बुद्ध के दर्शन के बहाने यह प्रदर्शनी लद्दाख के हस्तशिल्प और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देने का एक बड़ा जरिया बन गई है.

लेह से ज़ांस्कर तक: अवशेषों का आध्यात्मिक सफर

शेड्यूल के मुताबिक, ये पवित्र अवशेष कल (3 मई) से 10 मई तक लेह में आम जनता के दर्शन के लिए रखे जाएंगे. इसके बाद इन्हें दुर्गम ज़ांस्कर घाटी ले जाया जाएगा, जहाँ दो दिनों तक विशेष प्रार्थनाएँ होंगी. अंत में, 15 मई को एक भव्य समापन शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसके बाद इन पवित्र अवशेषों को वापस ससम्मान दिल्ली ले जाया जाएगा.

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वैश्विक मंच पर भारत की सांस्कृतिक विरासत

तथागत बुद्ध के अवशेषों की यह प्रदर्शनी भारत की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसमें वह भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को दुनिया भर में साझा करना चाहता है. ‘पूर्ण रूप से प्रबुद्ध’ बुद्ध के ये अवशेष भारत की शाश्वत सभ्यता की भावना को व्यक्त करते हैं. जानकारों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से लद्दाख में ‘स्पिरिचुअल टूरिज्म’ को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिलेगी.

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-भारत एक्सप्रेस

Rohit Agrawal

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