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महाराष्ट्र में किसकी बाजी? ठाकरे बंधुओं का मराठा दांव या बीजेपी-शिंदे की रणनीति, 29 नगरनिगम में प्रचार आज थमा

Maharashtra local body elections: महाराष्ट्र में निकाय चुनाव चल रहे है, जिसे लेकर सभी राजनीतिक पार्टियां अपना दमखम लगा रही हैं. एक तरफ ठाकरे बंधुओं ने मराठा अस्मिता का दांव खेला है, तो दूसरी तरफ बीजेपी-शिंदे अपनी रणनीतिक गठजोड़ में लगी हुई है. पांच महानगरपालिकाओं समेत 29 नगर निगमों के चुनाव होने हैं, जिसके लिए मंगलवार (13 जनवरी) का दिन चुनाव प्रचार के लिए आखिरी दिन है.

इन सभी चुनावों में सबसे ज्यादा नजर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी), नागपुर, पुणे और औरंगाबाद जैसे बड़े नगर निगमों पर होगी. एक तरफ शिवसेना का किला माने जाने वाली BMC में बीजेपी-शिंदे कितना सेंध लगा पाएगी, यह देखना काफी दिलचस्प होगा. वहीं बीजेपी और संघ का गढ़ कहे जाने वाले नागपुर में कौन बाजी मारेगा, इस पर भी सबकी निगाहें टिकी हैं.

30 साल से बीएमसी में शिवसेना का कब्जा (BMC Election 2026)

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में 30 से ज्यादा वर्षों से शिवसेना का कब्जा रहा है. ठाकरे परिवार पर अपने आखिरी किले को बचाने की बहुत बड़ी चुनौती है. डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के हाल ही में शिवाजी पार्क में एक साथ आने को ‘सुविधा की संधि’ बताया. शिंदे का मानना है कि यह गठबंधन बीएमसी चुनाव हारने के डर से हुआ है. उन्होंने कहा कि यह दिलों का मिलन नहीं है, बल्कि उन लोगों का विलाप है जो अपना आखिरी किला हारने से डर रहे हैं.

शवसेना के विभाजन के पहले 2017 में बीएमसी चुनाव शिवसेना और बीजेपी ने साथ मिलकर लड़ा था. जिसमें शिवसेना को 84 और बीजेपी को 82 सीटें मिली थीं. हालांकि तब शिवसेना और बीजेपी एक राहें लग नहीं हुई थी.

पुणे महानगर पालिका (Pune Municipal Corporation Election 2026)

महाराष्ट्र की सियासत में पुणे महानगर पालिका हमेशा से अहम मानी जाती रही है. 2017 के नगर निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने यहां जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए अपने दम पर बहुमत हासिल किया था. कुल 162 सीटों वाली PMC में बीजेपी ने 97 सीटें जीतकर सत्ता पर कब्जा जमाया. उस चुनाव में तत्कालीन अविभाजित एनसीपी को 39 सीटें मिली थीं, जबकि शिवसेना 10 सीटों तक सिमट गई थी. कांग्रेस के खाते में 9 और मनसे को केवल 2 सीटें आई थीं.

एजुकेशन और आईटी सेक्टर के लिए पहचाने जाने वाले पुणे में इस बार मुकाबला और दिलचस्प हो गया है. मौजूदा फडणवीस सरकार में शामिल अजित पवार गुट, यहां शरद पवार गुट के साथ तालमेल में चुनावी मैदान में उतर चुका है, जिससे राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं.

ठाणे महानगर पालिका (Thane Municipal Corporation election 2026)

ठाणे महानगर पालिका का चुनाव इस बार शिवसेना शिंदे गुट के लिए केवल सत्ता नहीं, बल्कि सियासी साख से जुड़ा मामला बन गया है. बालासाहेब ठाकरे की विरासत और पार्टी के पारंपरिक गढ़ में अब शिवसेना के दोनों धड़ों के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है.

एक ओर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अपने गृह क्षेत्र में संगठन की पकड़ बनाए रखने की कोशिश में हैं, तो दूसरी ओर उद्धव ठाकरे गुट ठाणे में अपनी पुरानी जमीन वापस पाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है. ऐसे में TMC का परिणाम यह तय करेगा कि शिवसेना का असली जनाधार किसके साथ है.


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नागपुर महानगर पालिका (Nagpur Municipal Corporation election 2026)

नागपुर को महाराष्ट्र की राजनीति का अहम केंद्र माना जाता है. यह शहर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का गृह क्षेत्र होने के साथ-साथ विदर्भ का सबसे बड़ा शहरी इलाका भी है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी गतिविधियों के कारण नागपुर की अलग राजनीतिक पहचान रही है. इसके अलावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का संसदीय क्षेत्र होने की वजह से भी यहां का नगर निगम चुनाव खास महत्व रखता है. ऐसे में नागपुर महानगर पालिका का परिणाम राज्य की राजनीति पर दूरगामी असर डाल सकता है.

महाराष्ट्र के प्रमुक नगर निगम: सीटें और बहुमत

 

महाराष्ट्र नगर निगम: सीटें और बहुमत

 

नगर निगम कुल सीटें बहुमत का आंकड़ा
मुंबई महानगर पालिका (BMC) 227 114
पुणे महानगर पालिका (PMC) 174 88
पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका 139 70
ठाणे महानगर पालिका (TMC) 142 72
नाशिक महानगर पालिका (NMC) 133 67
नागपुर महानगर पालिका (NMC) 156 79
नवी मुंबई महानगर पालिका (NMMC) 122 62

 

मुंबई में सियासी महामुकाबला

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में इस बार नगर निगम चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया है. बृहन्मुंबई महानगर पालिका में लगभग 1700 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. चुनावी रण में एक तरफ सत्ताधारी महायुति जिसमें बीजेपी, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित पवार गुट) शामिल हैं. तो दूसरी ओर महाविकास अघाड़ी, शिवसेना (उद्धव ठाकरे), कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार गुट) आमने-सामने है. खास बात यह है कि मुंबई में यह चुनाव उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे के संभावित नए गठबंधन की पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा भी माना जा रहा है.

कुल मिलाकर, महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनाव सिर्फ स्थानीय सत्ता की लड़ाई नहीं रह गए हैं, बल्कि 2024 के बाद बदलती राज्य की राजनीति का ट्रेलर बन चुके हैं. 29 नगर निगमों में आज प्रचार थमने के साथ ही यह साफ हो जाएगा कि मराठा अस्मिता का दांव भारी पड़ेगा या बीजेपी-शिंदे का रणनीतिक गठजोड़. नतीजे तय करेंगे कि महाराष्ट्र की सियासत में अगला बड़ा संदेश किसके नाम जाएगा.

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

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