Maharashtra Municipal Election: राजनीतिक इतिहास में एक ऐसा मंजर देखने को मिला है, जिसने सबको चौंका दिया है. महाराष्ट्र में चल रहे स्थानीय निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के गठबंधन की खबर ने न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या सत्ता के लिए पार्टियां अपने विचारधार से बिल्कुल विपरीत दलों से भी गठबंधन कर सकती हैं?
महाराष्ट्र में नगरपालिका चुनाव को लेकर राजनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे हैं, लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा था कि देश की दो सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी पार्टियां भाजपा (BJP) और कांग्रेस (Congress) एक साथ चुनाव लड़ेंगी. ठाणे जिले की अंबरनाथ नगरपालिका में बीजेपी और कांग्रेस पार्टी के स्थानीय नेताओं के बीच गठबंधन हुआ. माना जा रहा है कि डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की शिनसेना को सत्ता से दूर रखने के लिए यह दांव खेला गया. जिसकी जानकारी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भी नहीं थी. इसके अलावा, अकोला जिले के अकोट नगर परिषद चुनाव में बीजेपी ने अपने एक अन्य विरोधी AIMIM के साथ भी गठबंधन किया.
जैसे ही कांग्रेस आलाकमान को बीजेपी-कांग्रेस गठबंधन की जानकारी मिली, अंबरनाथ ब्लॉक कांग्रेस कमेटी को भंग कर दिया गया. ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप पाटील सहित सभी निर्वाचित पार्षदों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित कर दिया गया.
अंबरनाथ नगर परिषद में बीजेपी ने कांग्रेस और अजित पवार गुट की NCP के साथ मिलकर सत्ता हासिल की, जिसमें कांग्रेस के 12 पार्षद चुने गए थे. कांग्रेस ने साफ किया कि यह फैसला राज्य नेतृत्व की अनुमति के बिना लिया गया.
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने कहा कि कांग्रेस या AIMIM के साथ गठबंधन बीजेपी को स्वीकार नहीं है और स्थानीय नेताओं पर कार्रवाई की जाएगी. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने ठाणे में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि कांग्रेस से चुने गए 12 पार्षद अब औपचारिक रूप से बीजेपी में शामिल हो गए हैं और अगले दो-तीन दिनों में इसकी कागजी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी. वहीं, एकनाथ शिंदे ( Eknath Shinde) गुट की शिवसेना ने इसे गठबंधन धर्म के साथ धोखा बताया.
अंबरनाथ का नगरपालिका चुनाव बीजेपी के लिए काफी फायदेमंद साबित हुआ, जहां उसने न सिर्फ अपने सहयोगी शिवसेना को स्थानीय स्तर पर मात दी, बल्कि कांग्रेस से हाथ मिलाकर उसकी स्थानीय इकाई को भी लगभग समाप्त कर दिया. इस चुनाव ने साफ कर दिया कि राजनीति में कई बार विचारधारा से ज्यादा सत्ता और समीकरण अहम हो जाते हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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