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सावधान! मैंगो शेक के नाम पर कहीं आप भी तो नहीं पी रहे ‘जहर’? गुजरात में कीड़े वाले सड़े आमों से शेक बनाकर पिला रहे थे दुकानवाले

Gujarat News: अगर आप भी गर्मियों में मैंगो शेक पीने के शौकीन हैं तो जरा संभल जाइये. इन दिनों जूस सेंटर वाले आपको आम नहीं जहर पिला रहे हैं. ऐसा ही एक मामला गुजरात से सामने आया है. जहां एक जूस सेंटर पर छापेमारी में हजारों किलो सड़े-गले और कीड़े लगे आमों को बरामद किया गया. इन आमों का इस्तेमाल जूस बनाने के लिए किया जा रहा था. प्रशासन ने इन्हें जब्त कर नष्ट कर दिया है.

यह मामला गुजरात के मेहसाणा से सामने आया है. जहां के नुगर गांव के पास मौजूद महादेव औद्योगिक पार्क में एक थोक आम विक्रेता ने ‘पाटीदार रस केंद्र’ नाम से जूस सेंटर बना रखा था. खाद्य एवं औषधि विभाग को इस जूस सेंटर के संबंध में शिकायत मिली थी.

आम के अंदर चल रहे थे कीड़े

इसी शिकायत को लेकर खाद्य एवं औषधि विभाग के अधिकारी वी जे चौधरी और उनकी टीम ने छापेमारी की. जब विभाग के अधिकारी इस जूस सेंटर के अंदर दाखिल हुए तो वहां का नजारा देख दंग रह गए. उन्होंने इस छापेमारी के दौरान हजारों किलो सड़े-गले आम बरामद हुए. इन आमों के अंदर कीड़े भी पड़े हुए थे.

मौके से 2025 किलो आम बरामद

जूस विक्रेता इन आमों का इस्तेमाल जूस बनाने में कर रहा था. पुलिस ने मौके से 2025 किलो आम जब्त किये और मौके पर ही नष्ट कर दिये. इस दौरान खाद्य विभाग ने 230 किलोग्राम तैयार आम के जूस को भी नष्ट करा दिया.

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भारत में लगभग 1 करोड़ स्ट्रीट वेंडर्स जूस या अन्य खाने-पीने का सामान बेचते हैं. नेशनल एसोसिएशन ऑफ स्ट्रीट वेंडर्स ऑफ इंडिया के मुताबिक इन स्ट्रीट वेंडर्स पर हर साल करोड़ों लोग खाने पीने का सामान खरीदते हैं. आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि खाने-पीने के मामले में भारत में लोग किस हद तक बाहर के विक्रेताओं पर निर्भर हैं. बाजार में खुले में बिकने वाले इन जूस दुकानों पर सेहत नहीं जहर बेचा जा रहा है.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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