Marco Rubio India Visit: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की चार-दिवसीय भारत यात्रा रणनीतिक रूप से जितनी महत्वपूर्ण है, सोशल मीडिया पर उतनी ही विवादित होती जा रही है. शनिवार को भारत की धरती पर कदम रखते ही अमेरिका और उसके धुर विरोधी देश ईरान के बीच एक नया कूटनीतिक ‘ट्विटर वॉर’ छिड़ गया है.
दरअसल, मुंबई में स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास (Consulate General of Iran) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से अमेरिकी विदेश मंत्री पर सीधे हिंदी और अंग्रेजी मिश्रित लहजे में ऐसा तीखा व्यंग्य कसा है, जिसने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल मचा दी है. ईरान ने अमेरिकी नेतृत्व को नसीहत देते हुए कहा है कि वे भारत में आए हैं, तो लगे हाथ यहां की महान सभ्यता से कुछ सीख भी लें.
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत पहुंचते ही अपनी एक तस्वीर के साथ आधिकारिक बयान पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने लिखा था कि “भारत में उतरा. एक शानदार यात्रा की उम्मीद कर रहा हूं!” इस सीधे और सामान्य कूटनीतिक पोस्ट को कोट करते हुए ‘ईरान इन मुंबई’ के आधिकारिक एक्स (ट्विटर) हैंडल (@IRANinMumbai) ने बेहद अनौपचारिक और व्यंग्यात्मक अंदाज में पलटवार किया.
ईरानी दूतावास ने लिखा कि “थोड़ा सीख लो यार… ‘सभ्यता का क्रैश कोर्स’ फ्री में मिल जाएगा!” इसके साथ ही ईरान ने अपनी पोस्ट में भारत, ट्रंप और रुबियो जैसे हैशटैग्स का भी इस्तेमाल किया, जो साफ दिखाता है कि यह तंज बेहद सोच-समझकर और सीधे अमेरिकी प्रशासन पर निशाना साधने के लिए किया गया था.
अगर इस पूरे घटनाक्रम (Iran comment on Marco Rubio India Visit) का गहन कूटनीतिक विश्लेषण किया जाए, तो ईरान का यह बयान कोई साधारण सोशल मीडिया कमेंट नहीं है. अमेरिका और ईरान के रिश्ते लंबे समय से बेहद तनावपूर्ण रहे हैं, खासकर डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में ईरान पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बाद से दोनों देशों के बीच कड़वाहट चरम पर है.
चूंकि मार्को रुबियो राष्ट्रपति ट्रंप के बेहद करीबी और कट्टर ईरान-विरोधी रुख के लिए जाने जाते हैं, इसलिए ईरान ने उनके भारत दौरे को एक बड़े अवसर के रूप में देखा. भारत और ईरान के संबंध ऐतिहासिक रूप से बेहद मजबूत और सांस्कृतिक रूप से गहरे रहे हैं, और इसी रणनीतिक संबंध का फायदा उठाकर ईरान ने भारत की प्राचीन सभ्यता की श्रेष्ठता का हवाला देते हुए अमेरिका को उसकी कूटनीतिक ‘अशिष्टता’ के लिए आईना दिखाने की कोशिश की है.
ईरानी दूतावास द्वारा इस्तेमाल किया गया शब्द “सभ्यता का क्रैश कोर्स” दरअसल अमेरिका की उस एकतरफा और आक्रामक वैश्विक नीति पर सीधा प्रहार है, जिसके तहत वह दुनिया भर के देशों पर प्रतिबंध लगाता है या अपनी मर्जी थोपने की कोशिश करता है. ईरान का इशारा साफ था कि अमेरिका को भारत की उस सहिष्णु और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ वाली प्राचीन सभ्यता से कूटनीति सीखनी चाहिए, जो सभी देशों का सम्मान करना सिखाती है.
हालांकि, भारत के लिहाज से यह स्थिति (Iran comment on Marco Rubio India Visit) बेहद नाजुक है. भारत एक तरफ जहां अमेरिका के साथ ‘क्वाड’ और रणनीतिक सुरक्षा के मोर्चे पर बहुत आगे बढ़ चुका है, वहीं दूसरी तरफ चाबहार पोर्ट और कच्चे तेल के रणनीतिक समीकरणों के कारण वह ईरान के साथ अपने ऐतिहासिक रिश्तों को भी खराब नहीं करना चाहता.
मुंबई से उठी ईरान की यह सोशल मीडिया मिसाइल (Iran comment on Marco Rubio India Visit) अब कूटनीतिक गलियारों में एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है. सोशल मीडिया यूजर्स इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं; जहां कुछ लोग इसे ईरान की एक बेहद चतुर और तीखी कूटनीति मान रहे हैं, वहीं अमेरिकी समर्थक इसे एक राजनयिक मर्यादा का उल्लंघन बता रहे हैं.
कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि इस विवाद के बाद नई दिल्ली में होने वाली मार्को रुबियो, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मुलाकातों में पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के सुरक्षा समीकरणों और ईरान के रवैये पर भी पर्दे के पीछे गंभीर चर्चा हो सकती है. भारत की धरती पर दो महाशक्तियों के इस सीधे टकराव ने रुबियो के इस दौरे को और भी ज्यादा हाई-प्रोफाइल बना दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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