मथुरा जंक्शन के बाहर कूड़े का बड़ा ढेर
Mathura Railway Station Cleanliness: अगले हफ्ते यानी 4 सितंबर 2026 को कान्हा की नगरी में भगवान श्री कृष्ण का 5253वां पावन जन्मोत्सव (जन्माष्टमी) बेहद धूमधाम से मनाया जाना है. इस महापर्व के लिए देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालुओं और विदेशी पर्यटकों का सैलाब ब्रजभूमि पहुंच रहा है. लेकिन जैसे ही ये भक्त मथुरा जंक्शन (MTJ) पर कदम रख रहे हैं, उनका सामना भक्ति और आस्था से नहीं बल्कि भयंकर बदबू, गंदगी और अव्यवस्था के नरक से हो रहा है.
बता दें उत्तर मध्य रेलवे (NCR) और स्थानीय जिला प्रशासन के ‘वर्ल्ड क्लास’ स्टेशन और ‘स्वच्छ भारत’ के तमाम दावों की पोल स्टेशन के मुख्य एंट्री गेट पर लगे कचरे के ढेर खोल रहे हैं.
मथुरा जंक्शन के मुख्य प्रवेश द्वार के ठीक बाहर कूड़े का एक विशाल पहाड़ जमा हो चुका है. उमस और भीषण गर्मी के कारण इस कचरे से ऐसी बदबू और सड़ांध उठ रही है कि यात्रियों का पैदल निकलना भी मुहाल हो गया है. सबसे शर्मनाक बात यह है कि पर्याप्त और चालू हालत में सुलभ शौचालय न होने के कारण स्टेशन परिसर के रास्तों पर खुले में शौच और टॉयलेट की भरमार है.
दिल्ली से आए एक यात्री ने दर्द बयां किया कि
“स्टेशन के बाहर इतनी गंदगी है कि पैर रखने तक की जगह नहीं है, क्या कान्हा के धाम की यही छवि हम दुनिया के सामने लेकर जाएंगे?”
इस पूरी लापरवाही का सबसे गंभीर पहलू यह है कि यह बदहाल रेलवे स्टेशन श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर से मात्र 2 से 2.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. ट्रेन से आने वाले 80 फीसदी से अधिक श्रद्धालु इसी मुख्य एंट्री गेट से होकर ऑटो, ई-रिक्शा या पैदल जन्मभूमि और बांके बिहारी मंदिर की ओर निकलते हैं. जब भगवान के घर पहुंचने के मुख्य द्वार पर ही ऐसा शर्मनाक नजारा हो, तो रेल प्रशासन और नगर निगम की मुस्तैदी पर सवाल उठना तय है.
योगी सरकार हर साल जन्माष्टमी उत्सव के लिए मथुरा-वृंदावन नगर निगम और ब्रज तीर्थ विकास परिषद को विशेष बजट आवंटित करती है, ताकि गली-गली, चौराहों और रेलवे स्टेशनों को भव्य तरीके से सजाया और संवारा जा सके. लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि जब सरकार ब्रज पर पूरी तरह मेहरबान होकर पैसा बांट रही है, तो जंक्शन के बाहर सफाई के बुनियादी काम पर ताला क्यों लगा हुआ है?
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मथुरा जंक्शन को ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ और रेलवे री-डेवलपमेंट के तहत ‘आधुनिक व वर्ल्ड क्लास’ बनाने के लिए समय-समय पर करोड़ों रुपये स्वीकृत किए गए हैं. स्वच्छता रैंकिंग में भी मथुरा को टॉप पर लाने के बड़े-बड़े पोस्टर ठोके जाते हैं. लेकिन जन्माष्टमी जैसे पीक सीजन में, जब जिला प्रशासन को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहना चाहिए था, तब स्टेशन के बाहर फैला यह ‘कचरा राज’ सरकारी दावों के मुंह पर सीधा तमाचा है.
बारिश और उमस के इस मौसम में स्टेशन के बाहर जमा सड़ांध भरा कचरा बीमारियों को न्योता दे रहा है. खुले में टॉयलेट और गंदगी के चलते हैजा, डेंगू और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. मथुरा आने वाले बुजुर्गों और छोटे बच्चों के लिए यह बदबू बर्दाश्त से बाहर साबित हो रही है. यह सिर्फ अव्यवस्था नहीं बल्कि कान्हा के भक्तों की धार्मिक आस्था और जन-स्वास्थ्य के साथ खुला खिलवाड़ है.
-भारत एक्सप्रेस
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