MEA Target Asif Ali Zardari: भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर एक बार फिर भीषण वाकयुद्ध छिड़ गया है. इस बार विवाद की वजह बना है वाराणसी (काशी) की ऐतिहासिक गंज शहीदा मस्जिद को लेकर पाकिस्तानी हुक्मरानों का एक गैर-ज़रूरी और भड़काऊ बयान. पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद और भारत के अन्य मुस्लिम धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर मनगढ़ंत दावे किए थे, जिस पर भारत सरकार ने बेहद कड़ा और तल्ख रुख अपनाया है.
यह साफ करता है कि नई दिल्ली अब इस्लामाबाद की किसी भी गीदड़भभकी या आंतरिक मामलों में दखलंदाजी को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है. विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जरदारी के इस बयान को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह निराधार, हास्यास्पद और नफरत से प्रेरित एक घटिया राजनीतिक स्टंट करार दिया है.
ये भी पढ़ें: नेवी को मिले दुश्मन के काल: 3 स्वदेशी युद्धपोत से कितनी बढ़ेगी ताकत? पीएम मोदी ने की कमिशनिंग
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति की अनावश्यक टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलग-थलग पड़ चुका पाकिस्तान अपनी घरेलू विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के अनर्गल प्रलाप कर रहा है. जायसवाल ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति को भारत के घरेलू और आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई कानूनी या नैतिक अधिकार नहीं है. उन्हें इस तरह के संवेदनशील मामलों में दखल देने से तुरंत बचना चाहिए.
पाकिस्तानी हुकूमत को आड़े हाथों लेते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पाकिस्तान के अपने काले मानवाधिकार रिकॉर्ड की पूरी कुंडली खोलकर रख दी. रणधीर जायसवाल ने कहा कि जिस देश का अपना मानवाधिकार रिकॉर्ड दुनिया में सबसे खराब रहा है, उसकी तरफ से ऐसी खोखली टिप्पणियां आना बेहद हास्यास्पद है. भारत ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार निगरानी संस्थाओं और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) की रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान में विभिन्न धर्मों के अल्पसंख्यकों को दशकों से व्यवस्थित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है.
ये भी पढ़ें: क्रिकेट का शूरवीर वैभव सूर्यवंशी: 11 गेंद में जड़ा 50, एक झटके में तोड़ा 20 साल का रिकॉर्ड
भारत ने वैश्विक पटल पर पाकिस्तान को बेनकाब करते हुए कहा कि वहां खासकर हिंदू, ईसाई और अहमदिया समुदाय के खिलाफ हिंसा, जबरन धर्म परिवर्तन और भेदभाव की घटनाएं रोजमर्रा की बात बन चुकी हैं. धार्मिक अल्पसंख्यकों को दबाने के लिए वहां ईशनिंदा कानूनों (Blasphemy Laws) का सहारा लेकर मॉब लिंचिंग और हिंसा की वारदातों को अंजाम दिया जाता है, जिसे वहां की सरकारी नीतियों और भेदभावपूर्ण कानूनों का मौन संरक्षण प्राप्त है. ऐसे में नफरत और कट्टरता की राजनीति पर टिके पाकिस्तान के राष्ट्रपति का यह बयान केवल एक सोचा-समझा राजनीतिक हमला है, जिसकी कूटनीतिक बिसात पर कोई कीमत नहीं है.
Swami Govind Dev Giri wishes Amit Shah birthday: गृह मंत्री अमित शाह के जन्मदिन पर…
पीएम मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था आज की चुनौतियों का समाधान नहीं कर…
Chandauli Double Murder: चंदौली के धीना थाना क्षेत्र में दो युवकों के शव बोरे में…
Kashi Sanskriti Sansad Sunil Deodhar Swami Jitendranand: काशी में 3, 4 और 5 नवंबर को…
15th All India Police Archery Championship Ranchi Santosh Gangwar: रांची के मेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में…
तिब्बत और चीन में 7.0 तीव्रता के भूकंप से कई इलाकों में झटके महसूस किए…