देश में आखिरकार मानसून की एंट्री तो हो गई है, लेकिन अपने साथ यह राहत कम और आफत ज्यादा लेकर आया है. पूर्वोत्तर भारत से लेकर पहाड़ों और मैदानी इलाकों तक, आकाशीय आफत ने भारी तबाही मचानी शुरू कर दी है. आज 2 जुलाई 2026 को भी असम और अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ और भीषण भूस्खलन (Landslide) के चलते हालात बेहद गंभीर और चिंताजनक (Monsoon Alert Heavy Rainfall) बने हुए हैं.
देश की कई प्रमुख नदियां इस समय खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही हैं, जिससे निचले इलाकों में समंदर जैसा नजारा बन गया है. जलभराव और सड़कों के बह जाने से लाखों लोगों का जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर चुका है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने साफ कर दिया है कि आफत का यह सिलसिला अभी थमने वाला नहीं है, बल्कि देश के एक बड़े हिस्से में मौसम और भी ज्यादा विकराल रूप धारण करने जा रहा है.
पूर्वोत्तर के राज्यों में इस समय कुदरत का सबसे क्रूर चेहरा देखने को मिल रहा है. असम के धेमाजी जिले में उफनती नदी के तेज बहाव और कटाव के कारण एक पूरा रेलवे पुल क्षतिग्रस्त हो गया है, जिसके चलते पूर्वोत्तर की कई महत्वपूर्ण रेल सेवाएं ठप पड़ी हैं और युद्धस्तर पर मरम्मत का काम जारी है. असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के कई जिलों में बाढ़ का मटमैला पानी इंसानी आबादी वाले रिहायशी इलाकों में घुस चुका है.
वहीं दूसरी तरफ, पड़ोसी राज्य अरुणाचल प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने पहाड़ों को हिलाकर रख दिया है. कई जिलों में बड़े पैमाने पर हुए भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ (Flash Floods) के कारण मुख्य सड़कें मलबे में तब्दील हो चुकी हैं, जिससे कई शहरों का संपर्क पूरी तरह कट गया है. इन दोनों ही राज्यों में एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय प्रशासन मुस्तैदी से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर लोगों को सुरक्षित कैंपों तक पहुंचा रहे हैं.
देश के दूसरे छोर पर भी मानसून का हाहाकार (Monsoon Alert Heavy Rainfall) कम होने का नाम नहीं ले रहा है. मौसम विभाग ने तटीय कर्नाटक के इलाकों के लिए 2 और 3 जुलाई को लेकर ‘रेड अलर्ट’ जारी कर दिया है, जिसके तहत 204.5 मिलीमीटर से भी ज्यादा की विनाशकारी बारिश होने की संभावना जताई गई है. यह बेहद संवेदनशील चेतावनी 3 जुलाई की सुबह तक लागू रहेगी.
देश के शीर्ष हिस्से यानी जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के भी ज्यादातर इलाकों में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने पूरी तरह अपनी पैठ बना ली है. कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के बाद अचानक आने वाली बाढ़ (Flash Floods) का खतरा मंडरा रहा है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों को सख्त हिदायत दी है कि वे पहाड़ी नालों, नदियों और प्राकृतिक जलधाराओं से बिल्कुल दूर रहें क्योंकि पानी का स्तर पलक झपकते ही जानलेवा रूप ले सकता है.
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मैदानी इलाकों की बात करें तो वहां भी मौसम विभाग ने एक बेहद डरावनी चेतावनी (Monsoon Alert Heavy Rainfall) जारी की है. 2 जुलाई को उत्तर प्रदेश, देश की राजधानी दिल्ली और बिहार समेत देश के करीब 19 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश और भीषण आंधी-तूफान का कड़ा अलर्ट जारी किया गया है. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस दौरान आसमान से बरसने वाली आफत के साथ-साथ जमीनी धरातल पर 80 किलोमीटर प्रति घंटे की खतरनाक रफ्तार से तूफानी हवाएं चलेंगी, जो पेड़ों और कच्चे मकानों को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं. इस बिगड़ते मौसम को देखते हुए प्रशासन ने विशेष रूप से किसानों को सलाह दी है कि वे इस दौरान खुले खेतों या पेड़ों के नीचे जाने से पूरी तरह परहेज करें.
वहीं हिमाचल प्रदेश के मंडी जैसे पहाड़ी शहरों में भी घने काले बादलों ने डेरा डाल लिया है, जो किसी बड़े मौसम परिवर्तन की तरफ इशारा कर रहे हैं. फिलहाल ब्यास नदी अपने सामान्य स्तर पर है, लेकिन अगले 24 घंटे पूरे देश के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होने वाले हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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