Narottam Mishra Datia Controversy: मध्य प्रदेश की राजनीति में दतिया विधानसभा सीट हमेशा से सत्ता का पावर सेंटर रही है, लेकिन यहां की सियासी बिसात पूरी तरह उलझ चुकी है. बीजेपी के कद्दावर और सीनियर नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने और उनकी जगह आशुतोष तिवारी को दतिया से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद से ही पूरे क्षेत्र में असंतोष का ज्वालामुखी सुलग रहा है. दतिया की सड़कों पर नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों और कार्यकर्ताओं की नाराजगी खुलकर सामने आ रही है. इस अंदरूनी कलह और बगावत की आहट के बीच उद्धव की शिवसेना ने ऑफर भेज दिया है. वहीं कैलाश विजयवर्गीय का बयान भी चर्चा में है.
एक तरफ जहां उद्धव ठाकरे की पार्टी ने नरोत्तम मिश्रा को अपनी ‘मशाल’ थमाकर चुनावी मैदान में उतरने का खुला न्योता दे दिया है, वहीं बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बयानों ने इस सुलगती आग में घी डालने का काम किया है. दतिया के कार्यकर्ताओं के लिए विजयवर्गीय का यह बयान मरहम लगाने जैसा है या उनके जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा, आइए समझते हैं?
मंदसौर और दतिया के राजनीतिक गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया जब शिवसेना (UBT) के मध्य प्रदेश राज्य प्रमुख सुनील शर्मा ने सोशल मीडिया पर एक बेहद चौंकाने वाला पोस्ट किया. शिवसेना (UBT) के आईटी (IT) सेल प्रमुख नाहरसिंह सिसोदिया द्वारा जारी एक आधिकारिक वीडियो के अनुसार, उद्धव ठाकरे की पार्टी ने नरोत्तम मिश्रा को शिवसेना (UBT) के टिकट पर ‘मशाल’ चुनाव चिन्ह के साथ चुनाव लड़ने का सीधा ऑफर दे दिया है.
इस ऑफर को और ज्यादा आकर्षक और वजनदार बनाने के लिए शिवसेना ने दावा किया है कि यदि नरोत्तम मिश्रा इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं, तो खुद पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे समेत शिवसेना (UBT) के तमाम राष्ट्रीय स्तर के दिग्गज नेता मध्य प्रदेश में उनके लिए धुआंधार चुनाव प्रचार करने मैदान में उतरेंगे. यह ऑफर नरोत्तम मिश्रा की नाराजगी को भुनाकर मध्य प्रदेश में शिवसेना के विस्तार की एक बहुत बड़ी कूटनीतिक चाल मानी जा रही है.
नरोत्तम मिश्रा को मिले इस बाहरी ऑफर और दतिया में भड़के कार्यकर्ताओं के भारी गुस्से पर जब बीजेपी के दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय से सवाल पूछा गया, तो उनके जवाबों ने एक नई बहस को जन्म दे दिया. विजयवर्गीय के इस बयान को नरोत्तम समर्थकों के जख्मों पर नमक की तरह देखा जा रहा है.
दतिया में नरोत्तम मिश्रा के कार्यकर्ताओं के बागी तेवरों पर कैलाश विजयवर्गीय ने बेहद हल्के अंदाज में कहा कि पार्टी के अंदर डेमोक्रेसी है, कार्यकर्ता अपनी अभिव्यक्ति व्यक्त करता है. नरोत्तम जी के कार्यकर्ताओं का नाराज होना हमारे लिए कोई बड़ी बात नहीं है, हम एक बार कार्यकर्ताओं को बिठाकर बात कर लेंगे.
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जब उनसे पूछा गया कि क्या दतिया से आशुतोष तिवारी का टिकट बदला जा सकता है, तो उन्होंने दोटूक कहा कि मैं नरोत्तम जी को जानता हूं, वह बहुत पुराने और सीनियर कार्यकर्ता हैं. लेकिन एक बार टिकट डिक्लेअर होने के बाद बीजेपी में टिकट बदलने की परंपरा नहीं रही है. मुझे नहीं लगता कि दतिया का टिकट बदला जाएगा. आशुतोष तिवारी हमारे संगठन मंत्री रहे हैं और वह भारी मतों से जीतेंगे. मध्य प्रदेश में 230 सीटें हैं और 2000 से ज्यादा कार्यकर्ताओं ने तैयारी की थी, लेकिन पार्टी का निर्णय सर्वोपरि है.
विजयवर्गीय ने एक और बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि उन्होंने खुद इस गतिरोध को सुलझाने के लिए नरोत्तम मिश्रा को दो-तीन बार फोन लगाया था, लेकिन नरोत्तम मिश्रा ने उनका फोन तक नहीं उठाया और उनकी कोई बात नहीं हो सकी है.
दतिया की यह राजनीतिक लड़ाई अब केवल एक सीट की नहीं रह गई है, बल्कि यह बीजेपी के भीतर सांगठिनक अनुशासन बनाम व्यक्तिगत रसूख की बड़ी जंग बन चुकी है. कैलाश विजयवर्गीय का यह कहना कि ‘नाराजगी कोई बड़ी बात नहीं है’ और ‘टिकट किसी हाल में नहीं बदलेगा’, दतिया के उन समर्पित कार्यकर्ताओं को चुभ सकता है जो सालों से नरोत्तम मिश्रा के लिए पसीना बहा रहे हैं.
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अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या नरोत्तम मिश्रा संगठन के इस कड़े फैसले के आगे समर्पण करते हुए आशुतोष तिवारी के लिए काम करेंगे, या फिर उद्धव ठाकरे की ‘मशाल’ थामकर दतिया के इस अखाड़े में अपनी ही पार्टी के खिलाफ एक नया महाभारत छेड़ देंगे.
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