Nagastra-2 Anti-Tank Loitering Munition
Nagastra-2 Anti-Tank Loitering Munition: भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है. नागपुर स्थित सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड ने भारतीय सेना को स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया ‘नागास्त्र-2’ एंटी-टैंक लोइटर म्यूनिशन सिस्टम सौंपा है. यह आधुनिक हथियार निगरानी करने के साथ दुश्मन के बख्तरबंद लक्ष्यों को सटीक निशाना बनाने की क्षमता रखता है. कंपनी के मुताबिक, इस सिस्टम को दिन और रात में काम करने के लिए तैयार किया गया है. इसकी खासियत लंबी ऑपरेशनल रेंज, शक्तिशाली वारहेड और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के दौरान काम करने की क्षमता है.
सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड के अनुसार, नागास्त्र-2 में दिन और रात में निगरानी करने वाले कैमरे लगाए गए हैं. इसमें 4 किलोग्राम का टैंडेम शेप्ड-चार्ज वारहेड दिया गया है. कंपनी का दावा है कि यह 650 मिलीमीटर तक के रोल्ड होमोजेनियस आर्मर (RHA) से सुरक्षित लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है. इस तरह की क्षमता इसे बख्तरबंद वाहनों और अन्य संरक्षित सैन्य लक्ष्यों के खिलाफ उपयोगी बनाती है. यह सिस्टम आधुनिक युद्धक्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है, जहां निगरानी और सटीक हमले की क्षमता महत्वपूर्ण मानी जाती है.
नागास्त्र-2 की एक प्रमुख विशेषता इसकी ऑपरेशनल रेंज है. कंपनी के मुताबिक, यह सिस्टम ‘रिकवर एंड रीयूज’ मोड में 25 किलोमीटर तक और ‘फायर-एंड-फॉरगेट’ मोड में 50 किलोमीटर तक काम कर सकता है. रिकवर एंड रीयूज मोड में सिस्टम को वापस लाकर दोबारा इस्तेमाल करने की सुविधा मिलती है, जबकि फायर-एंड-फॉरगेट मोड में लक्ष्य की ओर भेजे जाने के बाद इसे लगातार नियंत्रित करने की जरूरत नहीं होती. कंपनी के अनुसार, यह सिस्टम 60 मिनट तक ऑपरेशन कर सकता है. इससे निगरानी और मिशन को अंजाम देने के लिए अतिरिक्त समय मिलता है.
आधुनिक युद्ध में इलेक्ट्रॉनिक युद्ध एक बड़ी चुनौती बन चुका है. कम्युनिकेशन जैमिंग, GPS जैमिंग और स्पूफिंग जैसी तकनीकों के जरिए विरोधी पक्ष सैन्य प्रणालियों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकता है. कंपनी के मुताबिक, नागास्त्र-2 में इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर्स (ECCM) क्षमता दी गई है. इसे इलेक्ट्रॉनिक बाधाओं के बीच सिस्टम की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए विकसित किया गया है.
नागास्त्र-2 भारतीय सेना को सौंपा जाना देश में स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. इससे आधुनिक सैन्य तकनीक के घरेलू विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. हालांकि, सिस्टम की वास्तविक परिचालन प्रभावशीलता का आकलन उसके इस्तेमाल, परीक्षण और सैन्य परिस्थितियों में प्रदर्शन के आधार पर ही किया जा सकेगा.
भारत एक्सप्रेस
Babulal Kharadi Controversial Statement: राजस्थान के मंत्री बाबूलाल खराड़ी के एक बयान से इन दिनों…
चंडीगढ़ के सेक्टर 34 में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन भावुक पलों के…
Ayodhya Deepotsav 2026: अयोध्या में 7 नवंबर को होने वाले दसवें दीपोत्सव में 30 लाख…
सोशल मीडिया पर पाकिस्तान समर्थित अकाउंट से फैलाए गए उस दावे को भारतीय सेना ने…
Yam Deep Daan on Dhanteras: धनतेरस पर यमराज के नाम का दीपदान करने की परंपरा…
Google DeepMind AI Military Controversy: पेंटागन और इजरायल के साथ सैन्य समझौतों के विरोध में…