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सबसे “खूंखार” नक्सली हिडमा मारा गया, सिर पर था 1 करोड़ रुपये का था इनाम

Naxalite Hidma Killed: भारत में अब नक्सलवाद अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है. इसी बीच नक्सली सफाया अभियान चला रहे सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता हाथ लगी है. सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बॉर्डर पर हुए मुठभेड़ में 1 करोड़ का इनामी नक्सली हिडमा मारा गया.

43 वर्षीय हिडमा ने दो दर्जन से अधिक कुख्यात नक्सली हमलों को अंजाम दिया था. जिसमें साल 2013 का दरभा घाटी नरसंहार और साल 2017 का सुकमा हमला भी शामिल है. हिडमा की मां ने कुछ दिनों पहले ही उससे सरेंडर करने की गुहार लगाई थी, लेकिन उसने अपनी मां की भी नहीं सुनी.

हिडमा की पत्नी के भी मारे जाने की खबर

बताया जा रहा है कि इस मुठभेड़ में हिडमा को मिलाकर कुल 6 नक्सली मारे गए हैं. जिसमें उसकी पत्नी भी शामिल थी. हिडमा की पत्नी पर भी 40 लाख रुपये का इनाम घोषित था.

कब हुई मुठभेड़?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ हफ्ते पहले आंध्र प्रदेश की खुफिया एजेंसी SIB को जानकारी मिली थी कि आंध्र-छत्तीसगढ़-ओडिशा बॉर्डर पर नक्सलियों की हलचल है. जिसके बाद सुरक्षाबलों ने इनके खिलाफ अभियान चलाया. 18 नवंबर दिन मंगलवार को सुबह 6 से 7 बजे के बीच आंध्र प्रदेश के अल्लुरी सीताराम राजू जिले के मारेडुमल्ली जंगल से उस समय हिडमा उर्फ संतोष अपनी पत्नी और साथियों के साथ निकल रहा था. तभी उनकी सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ हो गई. जिसमें सुरक्षाबलों को ये सफलता हाथ लगी.

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बता दें कि, हाल ही में टॉप नक्सल कमांडर मल्लोजूला वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था. पिछले 3 महीने में 300 से ज्यादा नक्सली आत्म समर्पण कर चुके हैं. जिसके चलते सुरक्षाबलों का फोकस अब हिडमा पर था.

मंगलवार की सुबह अल्लूरी सीताराम राजू जिले के एसपी अमित बरदार ने इस मुठभेड़ की पुष्टि की. उन्होंने बताया कि इस कार्रवाई में 6 नक्सली मारे गए हैं. अभी भी ऑपेरशन जारी है.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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