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Nikki Murder Case: मामले में पुलिस ने परिजनों को दिया आश्वासन, नोएडा कमिश्नर बोलीं- जल्द ही चार्जशीट होगी दाखिल, निक्की मर्डर केस से जुड़े 3 कानून से बच नहीं पाएंगे दोषी

Nikki Murder Case: ग्रेटर नोएडा के सिरसा गांव में 21 अगस्त की रात हुई निक्की भाटी की मौत ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है. शुरुआत में मामला दहेज हत्या का बताया गया लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है कहानी में कई और चौकाने वाले खुलासे हो रहे हैं.

परिजनों को न्याय का भरोसा

ग्रेटर नोएडा पुलिस कमिश्नर ने इस मामले में निक्की के परिवार को आश्वासन दिया है. उन्होंने कहा कि बहुत जल्द ही मामले को लेकर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की जाएगी. वहीं उन्होंने यह भी कहा कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी. इस दौरान कमिश्नर ने निक्की के परिवार को सख्त कार्रवाई का आश्वासन भी दिया.

निक्की के पिता ने क्या कहा?

इस बीच, निक्की के पिता ने कहा कि न्याय मिलने तक यह लड़ाई जारी रहेगी. पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द ही कार्रवाई का आश्वासन दिया है.

ऐसे मामले में किस कानून के तहत कार्रवाई

इस बीच देश में ऐसी घटनाओं को लेकर चर्चा होने लगी है. जिससे में NCRB के आंकड़ों के साथ ही दहेज को लेकर कानून के प्रावधान पर भी बात हो रही है. आइये ऐसे में हम आपको बताते हैं देश में ऐसी घटनाओं को रोकने और उनपर कार्रवाई करने के लिए कौन-कौन से कानून हैं और इनके क्या प्रावधान हैं?

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निक्की मर्डर केस (Nikki Murder Case) जैसी दहेज प्रथा को खत्म करने के लिए सरकार ने कई कड़े कानून बनाए हैं. इन कानूनों के तहत दहेज लेना और देना दोनों ही अपराध है. अगर कोई व्यक्ति दहेज की मांग करता है या दहेज के लिए किसी महिला को प्रताड़ित करता है, तो उसे कड़ी सजा का सामना करना पड़ सकता है.

दहेज को लेकर कानून के प्रावधान (Dowry laws in India)

दहेज प्रथा हमारे समाज में एक बड़ी समस्या है, जिसे खत्म करने के लिए सरकार ने कई कानून बनाए हैं. इन कानूनों के तहत दहेज लेना और देना, दोनों ही अपराध माना जाता है. अगर किसी महिला की मौत शादी के 7 साल के भीतर किसी चोट, जलने या असामान्य परिस्थितियों में हो जाती है और पता चलता है कि मौत से पहले उसके पति या रिश्तेदार ने उसे प्रताड़ित किया था, तो इसे दहेज हत्या माना जाता है.

  1. दहेज प्रतिषेध कानून, 1961 (Dowry Prohibition Act, 1961)
  2. भारतीय न्याय संहिता की धारा 80 (Bharatiya Nyay Sanhita Section 80)
  3. बीएनएस की धारा 85 (Bharatiya Nyay Sanhita Section 85)

दहेज प्रतिषेध कानून, 1961 (Dowry Prohibition Act, 1961)

दहेज प्रतिषेध कानून, 1961 के तहत दहेज लेना या देना दोनों ही अपराध है. इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर 5 साल की जेल और 15 हजार रुपये तक के जुर्माने की सजा का प्रावधान है. इसके अलावा, अगर सास-ससुर या कोई रिश्तेदार दहेज की मांग करता है, तो 6 महीने की कैद और 10 हजार जुर्माने का प्रावधान है। साल 2022 में इसके 13,479 केस दर्ज हुए थे.

भारतीय न्याय संहिता की धारा 80 (Bharatiya Nyay Sanhita Section 80)

भारतीय न्याय संहिता की धारा 80 (BNS Section 80) के तहत शादी के 7 साल के भीतर किसी महिला की मौत असामान्य परिस्थिति में होने पर दहेज हत्या माना जाएगा। दोषी पाए जाने पर पति और ससुराल वालों को 7 साल की जेल हो सकती है, जिसे उम्रकैद तक बढ़ाया जा सकता है. साल 2022 में इसके 6,450 मामले दर्ज किए गए थे.

बीएनएस की धारा 85 (Bharatiya Nyay Sanhita Section 85)

भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 महिला को पति या उसके रिश्तेदारों की क्रूरता से बचाती है. ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर 3 साल की कैद और जुर्माने की सजा का प्रावधान किया गया है. साल 2022 में इसके 1.40 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए गए थे. यह धारा IPC में धारा 498A हुआ करती थी.

दहेज के खिलाफ कानून एक मजबूत ढाल

निक्की मर्डर केस (Nikki Murder Case News) जैसी घटनाओं के खिलाफ यह कानून एक मजबूत ढाल हैं, जो महिलाओं को हिंसा और उत्पीड़न से बचाते हैं. भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80 और पहले की IPC धारा 498A जैसे प्रावधान सुनिश्चित करते हैं कि न सिर्फ पति, बल्कि ससुराल वाले भी क्रूरता और दहेज की मांग के लिए जवाबदेह हों. यह जरूरी है कि समाज का हर वर्ग, विशेषकर महिलाएं, इन कानूनों के बारे में जागरूक हों. ऐसे में कानून अपना काम के साथ देश के हालात में भी सुधार होगा. अगर हर आदमी जागरूक होगा तो देश में निक्की मर्डर केस जैसी घटनाएं रुक पाएंगी.

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-भारत एक्सप्रेस

Pankaj kumar Pandey

मैं पंकज कुमार पाण्डेय हूं और मूल रूप से बिहार के पश्चिम चंपारण से आता हूं, जो सत्याग्रह की धरती है. मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई चंपारण में ही हुई है. इसके बाद मैंने महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी मोतिहारी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की. अब तक विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा हूं. इस दौरान रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचार प्रस्तुति से जुड़े अहम पहलू सीखने को मिले. वर्तमान में मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं, जहां मेरी विशेष रुचि राजनीति, विदेश और सामाजिक जागरूकता से जुड़ी खबरों में है. क्योंकि मेरा मानना है कि पत्रकारिता महज एक नौकरी नहीं बल्कि देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी है.

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