Nitish Kumar biography: साल 1985 की वो दोपहर जब एक युवा इंजीनियर पहली बार निर्दलीय विधायक के रूप में बिहार विधानसभा की सीढ़ियां चढ़ रहा था, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह शख्स आने वाले चार दशकों तक बिहार की राजनीति की धुरी बन जाएगा. नीतीश कुमार एक ऐसा नाम जो कभी ‘सुशासन बाबू’ कहलाया, तो कभी अपनी रणनीतियों से विरोधियों को मात देने वाला ‘सियासी चाणक्य’. आज जब वे मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर राज्यसभा की ओर रुख कर गए हैं तो एक ऐसा रिकॉर्ड छोड़कर गए हैं जिसे तोड़ पाना शायद नामुमकिन होगा.
नीतीश कुमार के करियर की शुरुआत 1985 में निर्दलीय विधायक के रूप में हुई. उनकी मेधा और संगठन क्षमता ने उन्हें जल्द ही केंद्र की राजनीति में पहुंचा दिया. 1989 में वे बाढ़ से सांसद बने और वी.पी. सिंह की सरकार में मंत्री बने. 1994 में उन्होंने लालू यादव का साथ छोड़ ‘समता पार्टी’ बनाई, जिसने बिहार की राजनीति को नया मोड़ दिया. अटल बिहारी वाजपेयी के हनुमान बनकर उन्होंने रेल मंत्रालय संभाला और रेलवे में वो सुधार किए जिन्हें आज भी याद किया जाता है.
नीतीश कुमार के नाम बिहार में सबसे अधिक बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड दर्ज है. उनकी पहली पारी साल 2000 में सिर्फ 7 दिनों के लिए थी, लेकिन 2005 में उन्होंने जो वापसी की, उसने बिहार की तस्वीर बदल दी. इसके बाद 2010, 2015, 2017, 2020, 2022, 2024 और फिर नवंबर 2025 में वे 10वीं बार मुख्यमंत्री बने. उनके इस कार्यकाल में कई बार सहयोगी बदले—कभी बीजेपी के साथ सरकार बनाई तो कभी आरजेडी के साथ, लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी पर हमेशा ‘नीतीश’ ही विराजमान रहे.
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नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना सिर्फ एक पद का त्याग नहीं है, बल्कि बिहार में एक बड़े राजनीतिक वैक्यूम (खालीपन) की शुरुआत है. उन्होंने जातिगत जनगणना से लेकर शराबबंदी और महिला आरक्षण तक ऐसे कई फैसले लिए जिन्होंने समाज की जड़ों को छुआ. अब जबकि वे 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य की शपथ ले चुके हैं, बिहार के लोग अपने उस ‘मुख्यमंत्री’ को विदाई दे रहे हैं जिसने राज्य को अराजकता के दौर से निकालकर विकास की पटरी पर खड़ा किया. यह अंत नहीं, बल्कि नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन की एक नई पारी की शुरुआत है.
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