पहलगाम की वादियाँ इस बार न केवल प्राकृतिक सौंदर्य, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सद्भाव के अद्भुत दृश्य की गवाह बनीं. मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) के तत्वावधान में आयोजित ‘विशेष तिरंगा एवं शांति, सद्भाव एवं विकास यात्रा’ ने एक ऐतिहासिक पहल का साक्षी बनकर साबित कर दिया कि ‘हिंदू और मुसलमान कभी अलग नहीं हो सकते.’
डॉ. इंद्रेश कुमार, मार्गदर्शक, MRM, ने इस यात्रा को नेतृत्व प्रदान करते हुए ऐलान किया “हमारी संस्कृति, हमारा तिरंगा और हमारा संविधान हमें एक सूत्र में बाँधता है. चाहे इतिहास की विभीषिका हो या वर्तमान की चुनौती, हम साथ हैं और साथ रहेंगे.” उन्होंने POK (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर) को लेकर स्पष्ट कहा ”यह भारत का अभिन्न अंग है और एक दिन तिरंगा वहाँ भी लहराएगा.”
प्रो. (डॉ.) शाहिद अख्तर, कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत को याद करते हुए भावुक हो गए. उन्होंने कहा “यह धरती ऋषियों, सूफियों और संतों की है, जिन्होंने प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया. आतंकवाद हमारी पहचान नहीं, हमारी आत्मा ‘शांति’ है.”
इस मौके पर जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष डॉ. दरख्शां अंद्राबी, MRM संयोजक मोहम्मद अफजल, डॉ. शालिनी अली, और सैकड़ों स्थानीय नागरिक मौजूद रहे. सभी ने एक स्वर में कहा “कश्मीर का विकास, शांति और तिरंगा हमारी प्राथमिकता है.”
यात्रा के दौरान डॉ. इंद्रेश कुमार और MRM प्रतिनिधियों ने ऐशमुकाम स्थित बाबा ज़ैनुद्दीन ऋषि की दरगाह पर श्रद्धासुमन अर्पित किए. डॉ. दरख्शां अंद्राबी ने दरगाह के विकास कार्यों का जायजा लिया और कहा “यह स्थल हमारी साझी विरासत का प्रतीक है.”
यह यात्रा केवल एक जुलूस नहीं, बल्कि कश्मीर के नए भविष्य का उद्घोष थी. हर तरफ तिरंगे की चमक, हर गली में “भारत माता की जय” का नारा, और हर चेहरे पर देशभक्ति की भावना. यही है नए कश्मीर की तस्वीर. जैसा कि डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा – “हम सदियों से साथ हैं, आज हैं, और कल भी रहेंगे.”
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भारत एक्सप्रेस
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