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कब-कब और किस नेता ने Vande Mataram से किया इनकार? अमित शाह ने जारी कि लिस्ट

Parliament Winter Session: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर कांग्रेस के उन नेताओं की विस्तृत जानकारी दी है जिनका आचरण राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम गायन के समय ठीक नहीं रहा. यह मुद्दा इस लिए उठा है क्योंकि सोमवार को लोकसभा में वंदे मातरम (Vande Mataram) पर 10 घंटे तक चर्चा हुई थी. सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष के कई नेताओं ने इस पर अपनी राय रखी थी. चर्चा की शुरुआत खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी.

प्रधानमंत्री मोदी ने वंदे मातरम (Vande Mataram) पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस पर आरोप लगाया था कि मुस्लिम लीग और जिन्ना के कारण कांग्रेस ने वंदे मातरम को उपेक्षित किया. पीएम मोदी ने संसद में कहा कि बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा 1875 में लिखित वंदे मातरम् जब देश की ऊर्जा और प्रेरणा का मंत्र बन रहा था और स्वतंत्रता संग्राम का नारा बन गया था, तब मुस्लिम लीग की विरोध की राजनीति और मोहम्मद अली जिन्ना के दबाव में कांग्रेस झुक गई.

कौन हैं वे नेता?

  • 1. इमरान मसूद – कांग्रेस सांसद, सहारनपुर (08 दिसंबर 2025 को वंदे मातरम गाने से इनकार किया, धार्मिक आस्था का हवाला दिया)
  • 2. आगा सैयद मेहदी – नेशनल कॉन्फ्रेंस (08 दिसंबर 2025 को संसद चर्चा के दौरान राष्ट्रगीत गाने से इनकार किया)
  • 3. शफीकुर्रहमान बर्क – समाजवादी पार्टी (2019 में लोकसभा शपथ के समय वंदे मातरम न गाने की बात कही)
  • 4. जियाउर्रहमान बर्क – समाजवादी पार्टी (2025 में अपने दादा के रुख का समर्थन करते हुए राष्ट्रगीत न गाने की बात कही)
  • 5. कांग्रेस रैली में वंदे मातरम का केवल एक छंद गाया गया, राहुल गांधी के आने का इंतज़ार बताया गया (2018)
  • 6. आरिफ मसूद – कांग्रेस विधायक, मध्य प्रदेश (2019 में धार्मिक कारणों से राष्ट्रगीत गाने से इनकार किया)
  • 7. सिद्धारमैया – कांग्रेस नेता, कर्नाटक (2022 में संविधान दिवस कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं को वंदे मातरम न गाने को कहा)
  • 8. समाजवादी पार्टी – महाराष्ट्र (2025 में स्कूलों में वंदे मातरम अनिवार्य करने वाले आदेश को रद्द करने की मांग की)
  • 9. सऊद आलम – आरजेडी विधायक (2025 में विधानसभा में राष्ट्रगीत के दौरान खड़े होने से इनकार किया)

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गंभीर सियासी घटना बन रहा मुद्दा

एक तरफ सरकार संसद में वंदे मातरम (Vande Mataram) पर चर्चा करा रही है. दूसरी ओर देश में इसे लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. आरोप लगाए जा रहे हैं कि चुनावों को टारगेट करते हुए वर्ग विशेष को निशाना बनाया जा रहा है. इस बीच सरकार की ओर से ऐसे नाताओं का नाम जाहिर करने से मुद्दों और अधिक सियासी हो गया है.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

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