झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता ने बुधवार को पश्चिमी सिंहभूम में मुठभेड़ में दो नक्सलियों को मार गिराने वाले सुरक्षा एवं पुलिस बल के जवानों का हौसला बढ़ाया. मुठभेड़ की सूचना के बाद चक्रधरपुर अनुमंडल मुख्यालय पहुंचे डीजीपी ने कहा कि राज्य में नक्सलवाद अब खात्मे की ओर है. जो लोग खुद को नक्सली बताकर हिंसा और दहशत फैला रहे हैं, वे गुंडे हैं.
डीजीपी ने कहा कि ऐसे लोगों को बार-बार चेतावनी दी जा रही है कि ऐसे लोग खुद सरेंडर कर दें. राज्य सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत उनके पास मुख्यधारा में लौटने और पुनर्वास पाने का अवसर है. अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो पुलिस निश्चित तौर पर उनका सफाया कर देगी.
बताया गया कि बुधवार को चक्रधरपुर अनुमंडल अंतर्गत सोनुआ थाना क्षेत्र के जंगल में हुई मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों की पहचान भाकपा माओवादी संगठन के जोनल कमांडर संजय गंझू और हेमंती मंझियाइन के रूप में हुई है. हेमंती मंझियाइन बोकारो जिले के गोरगोरवा गांव की रहने वाली थी और वह एक करोड़ के इनामी नक्सली अनल की निजी सुरक्षा में तैनात रहती थी.
मारे गए दोनों नक्सली फिलहाल 15 लाख के इनामी अमित मुंडा के दस्ते में शामिल थे और किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी कर रहे थे. इसी दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों ने उन्हें घेरा तो उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी. जवाबी कार्रवाई में दो नक्सली मारे गए, जबकि बाकी अन्य भागने में सफल रहे.
मुठभेड़ के दौरान सुरक्षा बल का एक जवान भी जख्मी हुआ है, जिसे इलाज के लिए हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है. मुठभेड़ के बाद सर्च ऑपरेशन के दौरान दो इंसास राइफल के अलावा कई हथियार, नक्सली साहित्य और दस्तावेज बरामद किए गए हैं. इससे पहले 22 जनवरी को बोकारो के तेजनारायणपुर थाना क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में दो नक्सली मारे गए थे.
-भारत एक्सप्रेस
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