पीएम ने गुरुवार को मेलबर्न में आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम के दौरान दोनों देशों के बीच बढ़ती आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी पर विशेष जोर दिया. वैश्विक अनिश्चितताओं के इस दौर में उन्होंने दोनों लोकतांत्रिक देशों को एक-दूसरे का ‘नेचुरल’ (स्वाभाविक) और सबसे भरोसेमंद साझेदार बताया. इसके साथ ही, उन्होंने दोनों देशों के उद्योगपतियों और बिजनेस लीडर्स से स्वच्छ ऊर्जा, बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर), मैन्युफैक्चरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में आपसी सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की पुरजोर अपील की.
आर्थिक रोडमैप बिजनेस रिसेप्शन में दोनों देशों के दिग्गज कॉर्पोरेट लीडर्स का स्वागत करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि व्यापारिक जगत की यह विशाल मौजूदगी भारत और ऑस्ट्रेलिया के साझे भरोसे व भविष्य की उम्मीदों को दर्शाती है. वहां मौजूद उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा-
“आज पूरी दुनिया भू-राजनीतिक अनिश्चितता, सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) में रुकावट और गंभीर ऊर्जा संकट के दौर से गुजर रही है. ऐसे नाजुक समय में भारत और ऑस्ट्रेलिया के लिए स्वाभाविक और भरोसेमंद साझेदार के तौर पर मिलकर आगे बढ़ना अत्यंत आवश्यक और प्रासंगिक हो गया है. पिछले कुछ वर्षों में हमने दोनों देशों की अद्वितीय क्षमताओं को मिलाकर भविष्य के दीर्घकालिक सहयोग के लिए एक बेहद मजबूत ढांचा तैयार किया है.”
ऑस्ट्रेलिया के विशाल पेंशन फंड्स को लुभाते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने एक बेहद महत्वपूर्ण और भावनात्मक बात कही. उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के पेंशन फंड इस समय 4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की संपत्तियों (एसेट्स) का प्रबंधन कर रहे हैं. भारत में किसी की पेंशन या बचत को एक बेहद पवित्र जिम्मेदारी माना जाता है. हम इसे केवल एक पूंजी के रूप में नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के अटूट भरोसे के रूप में देखते हैं. भारत आपके पेंशन फंडों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित, स्थिर और टिकाऊ विकास के व्यापक अवसर प्रदान करता है. हमारा यह निरंतर प्रयास होगा कि भारत में आपका भरोसा भी मजबूत रहे और आपकी लगाई गई पूंजी भी निरंतर बढ़ती रहे.
शिक्षा और कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) के क्षेत्र में मजबूत होते रिश्तों की सराहना करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित डीकिन यूनिवर्सिटी (Deakin University) और यूनिवर्सिटी ऑफ वोलोंगोंग (University of Wollongong) ने पहले ही गुजरात की ‘गिफ्ट सिटी’ (GIFT City) में अपने अंतरराष्ट्रीय कैंपस सफलतापूर्वक स्थापित कर लिए हैं, जो भारत की शिक्षा प्रणाली में उनके गहरे विश्वास को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि हमारा साझा लक्ष्य छात्रों की इस आवाजाही (स्टूडेंट मोबिलिटी) को एक ‘टैलेंट पार्टनरशिप’ (प्रतिभा साझेदारी) में बदलना होना चाहिए.
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