PM Modi
भारत की उच्च शिक्षा को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) बेंगलुरु इंडोनेशिया में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय कैंपस स्थापित करेगा. यह परिसर इंडोनेशिया के मलांग स्थित सिंगहसारी विशेष आर्थिक क्षेत्र (Singhasari Special Economic Zone) में बनाया जाएगा. इस पहल का उद्देश्य सिर्फ इंडोनेशिया ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया के छात्रों और पेशेवरों तक भारतीय प्रबंधन शिक्षा पहुंचाना है.
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार इस परियोजना को दो चरणों में पूरा किया जाएगा. पहले चरण में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवरों के लिए कार्यकारी शिक्षा (Executive Education) कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे. इन पाठ्यक्रमों का फोकस बदलती वैश्विक जरूरतों के अनुरूप नेतृत्व क्षमता और आधुनिक प्रबंधन कौशल विकसित करना होगा.
इसके बाद दूसरे चरण में नियमित डिग्री आधारित प्रबंधन पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे. इस दिशा में IIM बेंगलुरु और सिंगहसारी विशेष आर्थिक क्षेत्र के प्रबंधन निकाय के बीच समझौता किया जाएगा.
इस कैंपस में पढ़ने वाले छात्रों और पेशेवरों को बेंगलुरु स्थित IIM परिसर का अल्पकालिक शैक्षणिक दौरा करने का अवसर भी मिलेगा. इससे वे भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम, उद्योग जगत और नवाचार से जुड़े माहौल को करीब से समझ सकेंगे. नए कैंपस का पाठ्यक्रम वैश्विक अर्थव्यवस्था की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा.
पढ़ाई के दौरान वैश्विक सप्लाई चेन, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जलवायु परिवर्तन, सतत विकास और स्वास्थ्य प्रबंधन जैसे विषयों पर विशेष जोर दिया जाएगा. छात्रों को उद्योग विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों के साथ संवाद का अवसर भी मिलेगा, जिससे उन्हें व्यावहारिक और वैश्विक अनुभव हासिल होगा.
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इससे पहले IIM अहमदाबाद दुबई, IIT दिल्ली अबू धाबी और IIT मद्रास जांजीबार में अपने अंतरराष्ट्रीय परिसर शुरू कर चुके हैं. अब IIM बेंगलुरु का इंडोनेशिया में विस्तार भारत की शिक्षा व्यवस्था को वैश्विक स्तर पर और मजबूत करेगा.
यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उस लक्ष्य को भी आगे बढ़ाती है, जिसके तहत भारतीय शिक्षण संस्थानों को दुनिया के अलग-अलग देशों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत और इंडोनेशिया के बीच शिक्षा, कौशल विकास और शोध के क्षेत्र में सहयोग मजबूत होगा. साथ ही भारत वैश्विक स्तर पर गुणवत्तापूर्ण और किफायती शिक्षा उपलब्ध कराने वाले एक भरोसेमंद ज्ञान साझेदार के रूप में अपनी पहचान और मजबूत करेगा.
-भारत एक्सप्रेस
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