प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के मौके पर देश के नाम एक बेहद खास संदेश सोशल मीडिया पर साझा किया है. उन्होंने इस दर्दनाक दौर को याद करते हुए उन सभी देशवासियों को दिल से नमन किया है जिन्होंने इतिहास के उस काले और वीभत्स दौर से बाहर निकलकर देश की तरक्की में अपना कीमती योगदान दिया.
पीएम मोदी ने कहा कि उन लोगों ने अपने अदम्य साहस और पक्के इरादों से यह साबित कर दिखाया कि कितनी भी मुश्किल परिस्थितियां क्यों न हों, अगर इंसान ठान ले तो अपने संकल्पों को पूरा कर सकता है. उन्होंने सभी से अपील की है कि हमें देश में आपसी सद्भावना और भाईचारे की भावना को और ज्यादा मजबूत करना चाहिए.
इस संदेश के साथ ही पीएम मोदी ने अपने ट्वीट में एक बेहद प्रेरणादायक संस्कृत श्लोक भी शेयर किया है जो जिंदगी की सच्चाई और मेहनत की अहमियत को बयां करता है.
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उन सभी देशवासियों का हृदय से नमन, जिन्होंने उस वीभत्स दौर से निकलकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने अपने साहस और सामर्थ्य से दिखाया कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को सिद्ध किया जाता है। आइए, सद्भावना और एकजुटता की… pic.twitter.com/lzLu5wbiXb
— Narendra Modi (@narendramodi) August 14, 2026
उद्यमस्य प्रसादेन दृश्यन्ते विविधाः कलाः.
कातरा एव जल्पन्ति यद् भाव्यं तद् भविष्यति॥
इस श्लोक का सीधा और सरल अर्थ यह है कि मेहनत और पुरुषार्थ की कृपा से ही जीवन में तरह-तरह की कलाएं और सफलताएं देखने को मिलती हैं. जो लोग कमजोर दिल या डरपोक होते हैं वे ही सिर्फ यह कहकर बैठ रहते हैं कि “जो किस्मत में होगा, वही होगा.” यानी जीवन में आगे बढ़ने के लिए हाथ पर हाथ रखकर बैठने के बजाय कर्म करना सबसे ज्यादा जरूरी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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