Parliament Monsoon Session: संसद का मानसून सत्र विपक्ष के भारी हंगामे और शोर-शराबे के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया. आंकड़ों पर नजर डालें तो इस बार जनता के पैसों और वक्त का भारी नुकसान हुआ है. पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च (PRS) के आंकड़ों के मुताबिक, इस मानसून सत्र में लोकसभा में तय समय का महज 15 फीसदी ही काम हो सका.
पिछले 22 सालों के इतिहास में यह लोकसभा का तीसरा सबसे कम कामकाज वाला सत्र साबित हुआ है. इससे पहले 2010 और 2013 के शीतकालीन सत्रों में ही इससे कम काम हुआ था.
राज्यसभा का भी ऐसा ही हाल
लोकसभा के मुकाबले राज्यसभा का प्रदर्शन थोड़ा बेहतर जरूर रहा, लेकिन वहां भी महज 33 प्रतिशत काम ही हो पाया. दूसरी ओर, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के अनुसार लोकसभा में 19 फीसदी और राज्यसभा में 39 फीसदी काम हुआ.
पीआरएस ने इस अंतर को स्पष्ट करते हुए बताया कि वे वास्तविक कामकाज के समय को निर्धारित समय से विभाजित करके यह प्रतिशत निकालते हैं, ताकि सभी सत्रों की तुलना का पैमाना एक समान रहे.
कब-कब ठप हुई संसद
संसदीय इतिहास में 2004 के बाद सबसे खराब दौर 2010 का शीतकालीन सत्र था, जब UPA-II सरकार के दौरान 2जी स्पेक्ट्रम मुद्दे पर हंगामे के कारण लोकसभा में सिर्फ 5 फीसदी काम हो पाया था.
2013 का शीतकालीन सत्र: तेलंगाना गठन और कोयला घोटाले के विरोध में लोकसभा में 8% और राज्यसभा में 19% काम हुआ.
2016 का शीतकालीन सत्र: नोटबंदी के मुद्दे पर हुए तीखे टकराव के चलते लोकसभा में 15% और राज्यसभा में 18% ही काम हो सका.
कभी हुआ रिकॉर्ड कामकाज
ऐसा नहीं है कि संसद में सिर्फ हंगामा ही होता रहा है. कई मौकों पर संसद ने रिकॉर्ड कामकाज भी किया है. एनडीए सरकार के दौरान फरवरी 2024 के बजट सत्र में लोकसभा ने अपने निर्धारित समय का 148 प्रतिशत और 2020 के मानसून सत्र में 145 प्रतिशत काम करके मिसाल पेश की थी.
वहीं राज्यसभा का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी फरवरी 2024 के सत्र में ही देखने को मिला था, जब 137 फीसदी उत्पादकता दर्ज की गई थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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