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‘साथ चलो, एक सुर में बोलो…’, ऋग्वेद के श्लोक से पीएम मोदी का देश को सबसे बड़ा संदेश

PM Modi Sanskrit Shloka: देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर भारतीय संस्कृति, सनातन ज्ञान और एकता का संदेश देते हुए शुक्रवार सुबह सोशल मीडिया पर एक बेहद पावन संस्कृत सुभाषित (श्लोक) साझा किया है. पीएम मोदी पिछले तीन दिनों से लगातार देशवासियों में नई ऊर्जा फूंकने और राष्ट्रीय कर्तव्य का बोध कराने के लिए एक से बढ़कर एक कड़क श्लोक और उनका हिंदी भावार्थ शेयर कर रहे हैं. शुक्रवार को प्रधानमंत्री ने देश को एकजुटता और आपसी सद्भाव का महा-संदेश देते हुए ऋग्वेद के एक प्रसिद्ध मंत्र को रेखांकित किया.

‘साथ चलें, एक सुर में बोलें और मन एक हों’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक साझा किया:

“सङ्गच्छध्वं संवदध्वं, सं वो मनांसि जानताम्. देवा भागं यथा पूर्वे, सञ्जानाना उपासते॥”

इसका अर्थ है कि हम सब साथ मिलकर चलें, एक सुर में बोलें और हमारे मन व विचार पूरी तरह एक हों. जिस प्रकार प्राचीनकाल में देवता एकमत होकर अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते थे, ठीक उसी तरह हमें भी हमेशा अटूट एकता और सौहार्द के साथ मिलकर राष्ट्र निर्माण के लिए कार्य करना चाहिए.

 

‘संविधान हत्या दिवस’ पर आजादी का वो श्लोक

इससे ठीक एक दिन पहले, गुरुवार को ‘संविधान हत्या दिवस’ के मौके पर पीएम मोदी ने आपातकाल (Emergency) के उस काले दौर को याद किया था जब भारतीय लोकतंत्र को बुरी तरह कुचला गया था. उस दौरान उन्होंने लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक कड़क श्लोक साझा किया था कि “स्वातन्त्र्यात् सुखमाप्नोति स्वातन्त्र्याल्लभते परम्. स्वातन्त्र्यान्निर्वृत्तिं गच्छेत् स्वातन्त्र्यात् परमं पदम्. जिसका अर्थ है कि स्वतंत्रता से ही मनुष्य सच्चा सुख प्राप्त करता है, स्वतंत्रता से ही वह जीवन की सर्वोच्च उपलब्धि पाता है, स्वतंत्रता से ही वह परम शांत अवस्था को प्राप्त होता है और स्वतंत्रता के माध्यम से ही मनुष्य परम पद को प्राप्त करता है.

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सामूहिक पुरुषार्थ से ही मिलेगी विकास के संकल्पों को सिद्धि

इससे पहले बुधवार (24 जून 2026) को भी पीएम मोदी ने राष्ट्र की समृद्धि को लेकर एक अद्भुत सुभाषित साझा किया था कि ‘यत्रोत्साहसमारम्भो यत्रालस्यविहीनता. नयविक्रमसंयोगस्तत्र श्रीरचला ध्रुवम्॥’- इसका मतलब है कि जहां परिश्रम राष्ट्रभक्ति के प्रखर उत्साह से प्रेरित होता है, जहां आलस्य से पूरी तरह रहित होकर निरंतर अपने कर्तव्य किए जाते हैं और जहां विनम्रता साहस के साथ संतुलित होती है, वहीं त्याग, तप और समर्पण से राष्ट्र की समृद्धि सदा अटल और चिरस्थायी बनी रहती है. पीएम मोदी के इन तीनों श्लोकों ने सोशल मीडिया पर एक नई सांस्कृतिक चेतना की लहर दौड़ा दी है.

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-भारत एक्सप्रेस

Rohit Agrawal

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