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नारी शक्ति से लेकर सफलता के आधार तक…पिछले 4 दिनों में पीएम मोदी ने शेयर किए ये 3 अद्भुत श्लोक, जीवन बदल देगा अर्थ

PM Modi’s Message: देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी कूटनीति और राजनीति के साथ-साथ भारत की सनातन संस्कृति और ज्ञान-परंपरा को भी वैश्विक मंच पर लगातार बढ़ावा देते रहते हैं. इसी कड़ी में मंगलवार (16 जून 2026) को पीएम मोदी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक बेहद ज्ञानवर्धक संस्कृत सुभाषित (श्लोक) साझा किया है.

इस श्लोक के जरिए प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं और नागरिकों को जीवन में सफलता हासिल करने, सही निर्णय लेने और सुख-समृद्धि के द्वार खोलने का महा-मंत्र दिया है, जिसकी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है.

पीएम मोदी ने श्लोक किया शेयर

प्रधानमंत्री मोदी ने संस्कृत वांग्मय के महान कवि भारवि के किरातार्जुनीयम् महाकाव्य से उद्धृत यह प्रसिद्ध श्लोक शेयर किया:

“सहसा विदधीत न क्रियामविवेकः परमापदां पदम्. वृणते हि विमृश्यकारिणं गुणलुब्धाः स्वयमेव सम्पदः॥”

क्या है इसका हिंदी अर्थ?

पीएम मोदी ने खुद इस श्लोक की व्याख्या करते हुए लिखा, “धैर्य, विवेक और दूरदर्शिता से किए गए कार्यों से ही सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं. इसलिए हर निर्णय में पूरी समझदारी जरूरी है, क्योंकि सोच-समझकर उठाया गया कदम ही सफलता का आधार बनता है.” सीधे शब्दों में कहें तो किसी भी कार्य को बिना सोचे-समझे (हड़बड़ी में) नहीं करना चाहिए, क्योंकि अज्ञानता और जल्दबाजी बड़ी विपत्तियों का कारण बनती है. इसके विपरीत, जो व्यक्ति अच्छी तरह विचार करके कदम उठाता है, गुणों की भूखी लक्ष्मी (सफलता और समृद्धि) स्वयं उसका चुनाव करती है.

15 जून का सुभाषित: ‘हर मिट्टी के ढेले में अलग सोच’

इससे ठीक एक दिन पहले, 15 जून को भी पीएम मोदी ने नवाचार (Innovation) और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए एक सुभाषित साझा किया था. उन्होंने एक वीडियो शेयर कर लिखा था कि जिस प्रकार हर जल स्रोत का स्वाद भिन्न होता है, उसी प्रकार हर प्रतिभा अपनी अनूठी पहचान रखती है. इन्हीं अलग-अलग और अनूठे विचारों के समन्वय से ही समाज में नवाचार और राष्ट्र की प्रगति संभव होती है.

12 जून का सुभाषित: नारी शक्ति को बताया त्रैलोक्य की जननी

इससे पहले 12 जून को पीएम मोदी ने भारत की नारी शक्ति को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताते हुए ऋग्वैदिक और पौराणिक परंपरा का यह श्लोक साझा किया था:

“नारी त्रैलोक्यजननी नारी त्रैलोक्यरूपिणी. नारी त्रिभुवनाधारा, नारी शक्तिस्वरूपिणी॥”

इसका अर्थ समझाते हुए प्रधानमंत्री ने लिखा था कि नारी ही तीनों लोकों की जननी और उसकी अभिव्यक्ति है. वही पूरे संसार का वास्तविक आधार और साक्षात शक्ति का स्वरूप है. आज हमारी माताएं, बहनें और बेटियां हर क्षेत्र में अपनी अद्भुत प्रतिभा से मां भारती का गौरव बढ़ा रही हैं.

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-भारत एक्सप्रेस

Rohit Agrawal

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