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नदियों से सीखो सेवा का मंत्र! पीएम मोदी ने सुभाषित के जरिए दिया राष्ट्र निर्माण का संदेश

PM Modi Sanskrit Shloka: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया. इसके जरिए उन्होंने लोगों को मानव कल्याण, सेवा और परोपकार के लिए अपने सामर्थ्य का इस्तेमाल करने का संदेश दिया.

नदियों से सीखने का संदेश

प्रधानमंत्री ने पोस्ट में लिखा कि नदियों का लगातार बहते रहना हमें सिखाता है कि अपनी क्षमताओं का उपयोग मानवता की भलाई के लिए किस तरह किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि निःस्वार्थ सेवा, समर्पण और दूसरों के हित में काम करने की भावना देश को आगे बढ़ाने और उसे नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

पीएम मोदी ने संस्कृत श्लोक साझा करते हुए बताया कि मनुष्य को अपना जीवन हमेशा दूसरों की सेवा और कल्याण के लिए समर्पित करना चाहिए. श्लोक में नदियों का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि वे बिना किसी स्वार्थ के बहती हैं और अपने जल से रास्ते में आने वाले अनगिनत जीवों के जीवन को पोषण देती हैं. अंत में वे समुद्र में समा जाती हैं.

लोककल्याण को बताया जीवन की सार्थकता

सुभाषित का संदेश है कि इंसान को भी अपनी क्षमता, संसाधनों और प्रतिभा का इस्तेमाल केवल निजी लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज और दूसरे लोगों के हित के लिए करना चाहिए. सेवा, परोपकार और लोककल्याण को ही मानव जीवन की वास्तविक सार्थकता बताया गया है.


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लगातार दे रहे हैं सकारात्मक संदेश

प्रधानमंत्री पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर संस्कृत के सुभाषित साझा कर रहे हैं. इससे पहले उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और उत्साह बनाए रखने का संदेश दिया था. बुधवार को साझा किए गए एक अन्य श्लोक के जरिए उन्होंने लोगों से शारीरिक क्षमता, धन, बुद्धि और वाणी का इस्तेमाल हमेशा परोपकार और कल्याणकारी कार्यों के लिए करने की अपील की थी. पीएम मोदी के इन संदेशों में सेवा, धैर्य और समाज के प्रति जिम्मेदारी को विशेष महत्व दिया जा रहा है.

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

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