पालनपुर/गांधीनगर (27 अक्टूबर 2026): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में केंद्र सरकार की नीतियां देश के ग्रामीण अर्थतंत्र और डेयरी सेक्टर में ऐतिहासिक तकनीकी क्रांति का सूत्रपात कर रही हैं. पशुपालकों की आमदनी को दोगुना करने और स्वदेशी गोवंश की आनुवंशिक क्षमता को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के संकल्प के साथ गुजरात के बनासकांठा जिले स्थित भीलड़ी (डीसा) में 325 करोड़ रुपये की लागत से बना ‘भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर’ (BBBRC) पूरी तरह तैयार हो चुका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 30 अक्टूबर 2026 को इस अत्याधुनिक अनुसंधान एवं प्रजनन केंद्र को राष्ट्र को समर्पित करेंगे.
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने भीलड़ी पहुंचकर कार्यक्रम स्थल और लोकार्पण समारोह से जुड़ी उच्चस्तरीय तैयारियों का गहन जायजा लिया है.
यह विशाल अनुसंधान केंद्र 127 एकड़ के भूभाग पर फैला है, जिसे बनास डेयरी ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के तकनीकी मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ के सशक्त वित्तीय व नीतिगत सहयोग से विकसित किया है. यह बनास डेयरी की उन पांच प्रमुख महत्वाकांक्षी विकास परियोजनाओं में शीर्ष पर है, जिनका प्रधानमंत्री अपनी गुजरात यात्रा के दौरान लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे.
गुजरात विधानसभा के अध्यक्ष और बनास डेयरी के चेयरमैन शंकर चौधरी ने मीडिया से बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की सराहना की. उन्होंने कहा:
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रति पशु दुग्ध उत्पादकता बढ़ाकर ग्रामीण पशुपालकों और किसानों की आय में क्रांतिकारी बदलाव लाने का सपना देखा था. पशु संवर्धन में अत्याधुनिक विज्ञान और जेनेटिक इंजीनियरिंग का उपयोग करने का उनका यही संकल्प आज BBBRC के रूप में धरातल पर साकार हुआ है. 30 अक्टूबर को इसका लोकार्पण देश के डेयरी इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ेगा. हमारा पक्का संकल्प है कि जिस मुकाम को हासिल करने में ब्राजील को 100 वर्ष लग गए, मोदी जी के नेतृत्व में भारत वह लक्ष्य आगामी 20 वर्षों में हासिल करेगा.”
यह केंद्र पशु प्रजनन विज्ञान के क्षेत्र में वैश्विक स्तर की उन्नत तकनीकों का उपयोग करेगा. इसमें अंडाणु निष्कर्षण (Ovum Pick-Up – OPU), इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) और भ्रूण स्थानांतरण (Embryo Transfer) की सुविधाएं शामिल हैं.
सामान्य परिस्थितियों में श्रेष्ठ नस्ल की गाय वर्ष में केवल एक ही बछड़े को जन्म दे पाती है. किंतु इस केंद्र में अपनाई जाने वाली अत्याधुनिक तकनीक की मदद से एक ही उच्च आनुवंशिक गुणवत्ता वाली गाय से सालभर में दर्जनों श्रेष्ठ बछड़े-बछड़ियां प्राप्त की जा सकेंगी. केंद्र सरकार ने इस सेंटर के माध्यम से प्रतिवर्ष 25,000 उन्नत और रोगमुक्त भ्रूणों के उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है.
यह आधुनिक केंद्र भारत की प्रमुख स्वदेशी गायों की नस्लों- कांकरेज, गिर, साहीवाल और थारपारकर – के साथ-साथ दुधारू भैंसों की उन्नत नस्लों—मेहसाणी, बन्नी, जाफराबादी और मुर्रा—के आनुवंशिक सुधार पर केंद्रित रहेगा.
बनास डेयरी के चेयरमैन ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में जब पशुपालकों के सामने चारे की उपलब्धता में कमी और पशुओं के पालन-पोषण की बढ़ती लागत बड़ी चुनौती है, ऐसे समय में यह केंद्र “कम पशु, लेकिन बेहतर गुणवत्ता और अधिक दूध” के सिद्धांत को बढ़ावा देगा.
सस्ते दरों पर जेनेटिक्स: यहां से उच्च कोटि के रोगमुक्त सांड, सीमेन (वीर्य) और फ्रोजन भ्रूण बेहद किफायती दरों पर सीधे किसानों व पशुपालकों को उपलब्ध कराए जाएंगे.
फैट और आय में बढ़ोतरी: भारतीय देसी नस्लें अत्यधिक गर्मी सहन करने और विपरीत मौसम में भी कम चारे पर उच्च गुणवत्ता युक्त वसा (Fat) वाला ए-2 दूध देने के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं. बेहतर आनुवंशिकी से दूध में फैट की मात्रा बढ़ेगी, जिससे किसानों को उनके दूध का बेहतर मूल्य मिलेगा.
वैश्विक निर्यात की राह: इस अनुसंधान केंद्र से भारतीय गोवंश की श्रेष्ठ नस्लों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी और भारत वैश्विक डेयरी व जेनेटिक निर्यात का बड़ा हब बनकर उभरेगा.
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