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2 अक्टूबर को PM मोदी का देशवासियों से खास आग्रह! जानिए राजघाट पहुंचकर प्रधानमंत्री ने खादी को लेकर क्या कहा?

Mahatma Gandhi Tribute: महात्मा गांधी की 157वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजघाट पहुंचकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए. पीएम ने बापू के विचारों को विकसित भारत की प्रेरणा बताया और कहा कि सत्ता से दूर रहकर भी वे करोड़ों लोगों के दिलों पर राज करते हैं. इस खास मौके पर उन्होंने देशवासियों से स्वदेशी को बढ़ावा देने और कम से कम एक खादी उत्पाद खरीदने का आग्रह भी किया.

राजघाट पहुंचकर पीएम मोदी ने बापू को दी श्रद्धांजलि

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजघाट पर उनको पुष्पांजलि अर्पित की. शुक्रवार को देशभर में महात्मा गांधी की जयंती मनाई जा रही है.

‘बापू के विचार विकसित भारत की प्रेरणा’ – सोशल मीडिया पर पीएम का संदेश

पीएम की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा गया, ‘बापू का कालजयी संदेश हमें एक बेहतर समाज और विकसित भारत की ओर प्रेरित करता रहे.’

सत्ता से दूर रहकर भी करोड़ों दिलों पर राज करते हैं गांधी जी: पीएम

प्रधानमंत्री की ओर से सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया गया. इस वीडियो के माध्यम से उन्होंने कहा, ‘2 अक्टूबर का हमारे राष्ट्र के लिए क्या महत्व है, इसे बच्चा-बच्चा जानता है. महात्मा गांधी के विचारों ने पूरी दुनिया को प्रेरित किया है. महात्मा गांधी ऐसे ही व्यक्ति थे और सत्ता से इतना दूर रहने के बावजूद आज भी वे करोड़ों लोगों के दिलों पर राज करते हैं.’

‘गर्व से कहें यह स्वदेशी है’: देशवासियों से खादी उत्पाद खरीदने की अपील

पीएम ने आगे कहा, ‘मैं समझता हूं कि जब तक मानवता के साथ गांधी जी के विचारों का प्रवाह बना रहेगा, तब तक गांधी जी की प्रेरणा और प्रासंगिकता भी हमारे बीच बनी रहेगी. गांधी जी ने हमेशा स्वदेशी को अपनाने पर बल दिया और उनमें खादी सबसे प्रमुख थी. आप सभी से मेरा आग्रह है कि दो अक्टूबर को कोई न कोई खादी उत्पाद जरूर खरीदें. गर्व से कहें कि ये स्वदेशी है.’

संस्कृत श्लोक के जरिए बताया सत्य और करुणा का मार्ग

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर सुभाषित शेयर कर लिखा, ‘पूज्य बापू का संपूर्ण जीवन सत्य, अहिंसा, करुणा और सेवा का ऐसा प्रकाशस्तंभ है, जो हर युग में मानवता का मार्ग प्रशस्त करता रहेगा.’ उनकी ओर से संस्कृत श्लोक, ‘अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च. निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः क्षमी॥’ साझा किया गया.

इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि जो व्यक्ति किसी भी प्राणी से द्वेष नहीं करता, सबसे प्रति मैत्री करुणा का भाव रखता है, जो ममता और अहंकार से रहित है, सुख-दुख में समभाव रखता है, और क्षमाशील है- वही श्रेष्ठ साधक है.

यह भी पढ़ें-PM मोदी के शांति वाले आइडिया के फैन हुए पुतिन, बोले – यूक्रेन जंग खत्म करने के लिए उनके पास बढ़िया प्लान है

-भारत एक्सप्रेस

Shubhra Rai

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