Bharat Express DD Free Dish

mahatma gandhi

1920 के दशक में पूर्वी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में महात्मा गांधी की छवि सिर्फ एक राजनीतिक नेता तक सीमित नहीं थी. गोरखपुर के किसानों के बीच वे ‘महात्मा’ के रूप में लोकप्रिय हो चुके थे, जिनसे जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं, अफवाहें और चमत्कारों की कहानियां प्रचलित थीं.

Shailesh Kumar On Nitish Kumar: बिहार सरकार के मंत्री शैलेश कुमार ने नीतीश कुमार को बिहार का गांधी करार दिया. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार तो ऑलरेडी बिहार में जितना काम किया है, अगर आप देखेंगे कि आजादी के बाद कोई एक महात्मा गांधी यहां पर पैदा लिया. तो दूसरा महात्मा गांधी बिहार के लिए नीतीश कुमार जी हैं.

PAKISTAN TEXTBOOK HISTORY 1947: 14 और 15 अगस्त की तारीखें भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास में सबसे अहम हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सीमा पार पाकिस्तान के स्कूलों में 1947 की आजादी, महात्मा गांधी, भगत सिंह और विभाजन के इतिहास को किस नजरिए से पढ़ाया जाता है?

PM Narendra Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल स्वतंत्रता सेनानियों और देशवासियों को श्रद्धांजलि देते हुए उनके साहस और बलिदान को याद किया. उन्होंने महात्मा गांधी के नेतृत्व और 'भारत छोड़ो' के आह्वान को स्वतंत्रता संग्राम में नई ऊर्जा देने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव बताया.

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के पेपर लीक के खिलाफ 26 दिनों तक अनशन करने वाले पर्यावरणविद और सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को सोमवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया.

1946 का वर्ष भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अंतिम चरण का था, जब सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही थी. कांग्रेस पार्टी को अपना नया अध्यक्ष चुनना था, और यह पद अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा था.

दांडी मार्च की वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने संस्कृत सुभाषितम् साझा कर सत्याग्रहियों को याद किया. अमित शाह और सीएम योगी ने भी बापू के नमक सत्याग्रह को नमन किया.

दांडी मार्च की वर्षगांठ पर गृह मंत्री अमित शाह ने महात्मा गांधी और सत्याग्रहियों को दी श्रद्धांजलि. जानिए कैसे 12 मार्च 1930 को शुरू हुई इस यात्रा ने 'स्वदेशी' और 'आत्मनिर्भरता' की नींव रखी.

चौरी चौरा कांड की 104वीं वर्षगांठ पर यह घटना फिर याद दिलाती है कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अहिंसा और जनाक्रोश के बीच संतुलन कितना जटिल था. 1922 की इस घटना ने ना सिर्फ असहयोग आंदोलन को रोका, बल्कि राष्ट्रीय आंदोलन की दिशा और बहस को हमेशा के लिए बदल दिया.

VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने फिल्म ‘गोदान’ को गौ-रक्षा, गांधी-विवेकानंद के विचारों और संस्कृति से जुड़ा एक सशक्त सामाजिक संदेश बताया है.