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वाराणसी में महिला कर्मचारी ने बताई अपने गांव की बदलती सोच, पीएम मोदी बोले- योगी जी को थैंक्यू बोलो

वाराणसी में एक महिला कर्मचारी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई छोटी-सी बातचीत इन दिनों महिला सुरक्षा और रोजगार से जुड़े एक अहम मुद्दे को सामने लाती है. बात उस भरोसे की है, जिसकी वजह से अब गांवों में भी परिवार अपनी बेटियों को नौकरी करने के लिए घर से बाहर भेजने को पहले के मुकाबले ज्यादा तैयार नजर आ रहे हैं.

महिला ने प्रधानमंत्री को अपने अनुभव के बारे में बताया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर इशारा किया और कहा, ‘तो योगी जी को थैंक्यू बोलो.’ इस पर महिला भी हंस पड़ी और बोली, ‘थैंक्यू सर, सबको थैंक्यू सर.’

कंपनी खुलने से रोजगार के साथ बदली परिवारों की सोच

यह पूरा वाकया उस समय हुआ, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी में अरविंद गारमेंट कंपनी की नई इकाई का उद्घाटन करने पहुंचे थे. कार्यक्रम के बाद उन्होंने वहां काम करने वाली महिलाओं से बातचीत की और उनके कामकाज व अनुभवों के बारे में जाना.

इसी दौरान एक महिला कर्मचारी ने बताया कि कंपनी शुरू होने से उसके जैसे कई लोगों को रोजगार का अवसर मिला है. लेकिन इस बदलाव का असर सिर्फ कमाई तक सीमित नहीं है. गांवों में परिवारों की सोच भी बदल रही है. अब माता-पिता अपनी बेटियों को नौकरी करने और अपने पैरों पर खड़े होने के लिए बाहर भेजने को लेकर पहले से ज्यादा सहज महसूस कर रहे हैं.

महिला ने अपनी बात रखते हुए कहा कि कंपनी में सुरक्षा का अच्छा माहौल है. इससे परिवारों का भरोसा बढ़ा है और वे भी चाहते हैं कि उनकी बेटियां घर से बाहर निकलें, काम करें और आगे बढ़ें. वह प्रधानमंत्री को इस बदलाव के लिए धन्यवाद दे रही थी, तभी मोदी ने बीच में ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जिक्र करते हुए उन्हें धन्यवाद देने को कहा.

महिला सुरक्षा का भरोसा क्यों है जरूरी?

इस बातचीत की खास बात यह रही कि महिला ने किसी सरकारी योजना का नाम नहीं लिया और न ही आंकड़ों के जरिए अपनी बात रखी. उसने अपने गांव और आसपास के परिवारों में नजर आ रहे बदलाव का अनुभव साझा किया. उसकी बात से साफ था कि महिलाओं के लिए नौकरी का अवसर मिलना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी उनके परिवारों का सुरक्षा को लेकर निश्चिंत होना भी है.

अक्सर ऐसा होता है कि नौकरी करने की इच्छा रखने वाली युवतियों के सामने परिवार की चिंता एक बड़ी चुनौती बन जाती है. घर से दूरी, आने-जाने का रास्ता और कार्यस्थल का माहौल जैसे सवाल माता-पिता के मन में रहते हैं. ऐसे में अगर काम करने की जगह सुरक्षित महसूस हो और परिवार को भरोसा मिले, तो बेटियों के लिए रोजगार की राह आसान हो सकती है.

महिला सुरक्षा के लिए सरकार ने उठाए कई कदम

उत्तर प्रदेश में 2017 के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने महिला सुरक्षा को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया. स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के खिलाफ होने वाली छेड़छाड़ की घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से एंटी रोमियो स्क्वॉड की शुरुआत की गई.

इसके अलावा मिशन शक्ति अभियान के जरिए महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया. पुलिस थानों में महिला हेल्प डेस्क और कई प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर पिंक बूथ जैसी व्यवस्थाएं भी शुरू की गईं. इनका मकसद महिलाओं की शिकायतों को सुनने और जरूरत पड़ने पर उन्हें मदद उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को आसान बनाना है.

हालांकि, किसी भी व्यवस्था की असली अहमियत इस बात से समझी जाती है कि लोगों को अपने रोजमर्रा के जीवन में उसका कितना भरोसा महसूस होता है. वाराणसी की महिला कर्मचारी की बात इसी पहलू पर ध्यान खींचती है. उसके अनुभव के मुताबिक, सुरक्षित माहौल की वजह से परिवार अब बेटियों को काम करने का मौका देने के लिए तैयार हो रहे हैं.

स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते

अरविंद गारमेंट कंपनी की नई इकाई स्थानीय महिलाओं को प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रही है. अपने आसपास काम मिलने से महिलाओं को आजीविका कमाने का मौका मिलता है और परिवार के पास भी उनकी नौकरी को लेकर भरोसा करने की एक वजह होती है.

इस तरह रोजगार और सुरक्षा का सवाल एक-दूसरे से जुड़ जाता है. जब महिलाओं को काम करने का अवसर मिलता है और परिवार उनका साथ देने के लिए तैयार होते हैं, तो वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं. इसका असर केवल एक महिला तक सीमित नहीं रहता, बल्कि धीरे-धीरे पूरे परिवार और समाज की सोच में भी बदलाव ला सकता है.

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-भारत एक्सप्रेस

Shreyansh Choubey

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