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प्रशांत किशोर की जीत के बाद कैसा है जनसुराज के आश्रम का हाल?

पटना: बिहटा/धर्मेंद्र आनंद: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी के गढ़ में सेंध लगाकर जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की प्रचंड जीत के बाद बिहटा के अमहारा गांव स्थित नव निर्माण आश्रम में उत्सव का माहौल है. आश्रम को फूलों और झंडों से सजाया गया है, कार्यकर्ता एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जीत का जश्न मना रहे हैं. ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच समर्थक लगातार प्रशांत किशोर के समर्थन में नारे लगा रहे हैं.

आश्रम साबित हुआ लकी

ग्रामीणों का कहना है कि जातीय समीकरणों से इतर बांकीपुर की जनता ने विकास और मुद्दों की राजनीति को चुना है. उनका मानना है कि इस जीत ने बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत की है, जहां चुनाव जाति नहीं बल्कि शिक्षा, रोजगार और विकास जैसे मुद्दों पर लड़े जाएंगे.

अमहारा गांव के लोगों का दावा है कि करीब चार महीने पहले जब प्रशांत किशोर ने राजनीतिक गतिविधियों के लिए इस गांव में नव निर्माण आश्रम बनाया, तभी से उनकी राजनीतिक यात्रा को नई दिशा मिली. ग्रामीण इसे शुभ संकेत मानते हुए कहते हैं कि इससे पहले प्रशांत किशोर पटना के अलग-अलग स्थानों से अपनी राजनीतिक गतिविधियां संचालित करते थे, लेकिन अमहारा आने के बाद उन्हें बड़ी राजनीतिक सफलता मिली.

आश्रम पहुंचे जनसुराज के कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह जीत केवल एक सीट की जीत नहीं, बल्कि बिहार की जनता के बदलते राजनीतिक सोच का संदेश है. उनका दावा है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में भी जनता विकास और व्यवस्था परिवर्तन के मुद्दे पर जनसुराज का साथ देगी.


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19 हजार वोटों से जीता चुनाव

पटना की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बड़ा राजनीतिक उलटफेर करते हुए भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 19,324 वोटों के बड़े अंतर से पराजित कर दिया. प्रशांत किशोर को कुल 64,151 वोट मिले, जबकि नीरज कुमार सिन्हा 44,827 वोट ही हासिल कर सके. हालांकि यह सिर्फ एक विधानसभा सीट का उपचुनाव था, लेकिन 30 जुलाई को हुए इस चुनाव में 35 प्रतिशत से भी कम मतदान के बावजूद आए नतीजे ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी. इस जीत को जन सुराज के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता और भाजपा के लिए महत्वपूर्ण झटका माना जा रहा है.

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

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