लोकसभा में एंटी-पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए सरकार से कई सवाल पूछे और आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है.
प्रियंका गांधी ने कहा कि देश के युवाओं के सामने सबसे बड़ी समस्याओं में रोजगार और परीक्षा व्यवस्था की खामियां शामिल हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों-करोड़ों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है, लेकिन इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर अब तक सख्त कार्रवाई नहीं हुई.
संसद में बोलते हुए प्रियंका गांधी ने छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सवाल किया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर आंसू गैस, लाठीचार्ज, पेलेट गन और अन्य सख्त तरीकों का इस्तेमाल करने की जरूरत क्यों पड़ी.
उन्होंने कहा, “क्या ये छात्र आतंकवादी थे, जिनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया? देश के युवाओं पर पेलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया? इस सवाल का जवाब प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को देना होगा. सिर्फ कांग्रेस नहीं, बल्कि पूरा देश इसका जवाब चाहता है.”
प्रियंका गांधी ने एक घायल छात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि वह कुछ दिन पहले दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंची थीं, जहां वह छात्रा पुलिस लाठीचार्ज के बाद गंभीर हालत में आईसीयू में भर्ती थी. उन्होंने बताया कि छात्रा की मां की पीड़ा देखकर वह भावुक हो गईं.
कांग्रेस सांसद के मुताबिक, उनके अस्पताल पहुंचने से पहले स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और कुछ अन्य नेता भी छात्रा से मिलने पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि जब वह वहां पहुंचीं तो छात्रा की मां काफी परेशान थीं. प्रियंका गांधी ने बताया कि मां ने कहा कि वह किसी से मिलना या बात नहीं करना चाहतीं, क्योंकि सुबह से कई नेता आ रहे हैं, वीडियो बना रहे हैं, लेकिन उनकी बेटी की हालत के लिए जिम्मेदार लोग भी वहां पहुंच रहे हैं.
प्रियंका गांधी ने कहा कि उस मां का दर्द साफ नजर आ रहा था और उनका पूरा शरीर कांप रहा था. उन्होंने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर युवाओं की आवाज से डर क्यों लग रहा है और छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध को दबाने का अधिकार किसने दिया.
उन्होंने परीक्षा प्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए. प्रियंका गांधी ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में 152 पेपर लीक के मामले सामने आए हैं, जिनसे बड़ी संख्या में छात्र प्रभावित हुए, लेकिन पेपर लीक से जुड़े माफिया के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई.
उन्होंने कहा कि रोजगार देने वाले क्षेत्रों को कमजोर करने और परीक्षा व्यवस्था की विफलताओं का खामियाजा देश के युवाओं को भुगतना पड़ रहा है. प्रियंका गांधी ने मांग की कि सरकार को संसद और देश के सामने इन मुद्दों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए और युवाओं के भरोसे को वापस हासिल करने के लिए ठोस कदम उठाना चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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