Pune Porsche case viral video: देश को हिलाकर रख देने वाले पुणे के बहुचर्चित ‘पोर्श कार कांड’ ने एक बार फिर पूरे देश के सिस्टम और न्याय व्यवस्था पर बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है. 19 मई 2024 की वो काली रात कोई नहीं भूल सकता, जब कल्याणी नगर इलाके में शराब के नशे में धुत एक रईसजादे ने अपनी करोड़ों की पोर्श कार से दो निर्दोष सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स, अश्विनी कोष्ठा और अनीस अवधिया को बेरहमी से कुचल दिया था.
इस खौफनाक हादसे में करीब 18 महीने जेल की हवा खाने के बाद आरोपी के बिल्डर पिता विशाल अग्रवाल को जैसे ही अदालत से जमानत मिली, सोशल मीडिया पर अग्रवाल परिवार के जश्न का एक बेहद शर्मनाक वीडियो वायरल हो गया, जिसने पूरे देश के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है.
सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे इस कथित वीडियो में जमानत पर छूटे विशाल अग्रवाल और उनकी पत्नी गले में नोटों की मोटी-मोटी मालाएं पहनकर फिल्मी गानों पर बेपरवाह होकर नाचते और जश्न मनाते दिख रहे हैं. इस क्लिप के सामने आते ही इंटरनेट पर नेटिजन्स का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है. लोग इस बात पर गहरी नाराजगी जता रहे हैं कि दो हंसते-खेलते परिवारों को हमेशा के लिए तबाह करने के बाद भी इस अमीर परिवार के चेहरे पर पछतावे या शर्म की एक लकीर तक नहीं है.
हालांकि इस वीडियो की टाइमलाइन की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसने समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या सच में रईसजादों के लिए गरीबों की जान महज़ एक खिलौना है?
इस वायरल वीडियो (Pune Porsche case viral video) को देखकर हादसे में मारी गई अश्विनी कोष्ठा के बेबस पिता सुरेश कोष्ठा का दर्द और गुस्सा ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ा. उन्होंने रोते हुए बेहद तीखा तंज कसा कि ‘शायद उनके रईस समाज में दो मासूमों की जान लेकर जश्न मनाने की ही परंपरा होगी, वे हम जैसे आम नागरिकों और कानून का मजाक उड़ा रहे हैं.
सुरेश कोष्ठा ने भारत की न्याय व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि कानून सिर्फ हम जैसे कमजोर लोगों को बांधने के लिए है, जबकि इन रसूखदारों को सजा से बचने के सौ रास्ते मिल जाते हैं. उन्होंने सिस्टम से सवाल पूछा कि क्या नाबालिग होने का टैग मिल जाने से किसी को भी मर्डर करने का लाइसेंस मिल जाता है?
अपनी लाडली को खो चुके पिता ने रोते हुए देश के कानून को बदलने की पुरजोर मांग उठाई है. सुरेश कोष्ठा ने कहा कि जब तक भारत में खाड़ी देशों की तरह ‘खून के बदले खून’ जैसा खौफनाक और सख्त कानून नहीं बनेगा, तब तक इन अमीरजादों के दिलों में कानून का डर कभी पैदा नहीं होगा. उन्होंने कहा कि निचली अदालतें सजा सुनाती हैं और रसूख के दम पर ऊपरी अदालतों से इन्हें राहत मिल जाती है, जिससे अपराधियों के हौसले और बुलंद होते हैं.
पीड़ित परिवार ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है कि इस मामले में दखल देकर आरोपी पिता-पुत्र की जमानत तुरंत रद्द की जाए और इन्हें वापस जेल की कालकोठरी में सड़ाया जाए, ताकि देश के आम आदमी का अदालत पर भरोसा कायम रह सके.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
Russia Ukraine War: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत सरकार ने बुधवार को एक बार फिर…
Election Commission Dispute: भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के पूर्व संयुक्त निदेशक मोहम्मद अमीन ने बुधवार…
CJI Surya Kant viral caste remarks fact check: सोशल मीडिया पर जाति और आरक्षण को…
Ujjain Riot: सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत चल रहे चौड़ीकरण कार्य के दौरान हुए उपद्रव…
Flydubai Hijacking: विमान के ओमानी को-पायलट ने मुख्य पायलट स्मित मचार पर चाकू से हमला…
CAQM Pollution Action Plan: दिल्ली-NCR में सर्दी आते ही प्रदूषण का ग्राफ बढ़ जाता है,…