Punjab Cabinet Decisions 2026: पंजाब की भगवंत मान सरकार ने सूबे की तरक्की और कानून-व्यवस्था को लेकर कई बड़े और कड़े फैसले लिए हैं. कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बैठक के बाद मीडिया से रूबरू होते हुए बताया कि सरकार ‘रंगला पंजाब’ के सपने को सच करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. इस कैबिनेट मीटिंग में खेल से लेकर गांव के विकास और धार्मिक मर्यादा की रक्षा तक, हर पहलू पर मुहर लगाई गई है.
सबसे बड़ा फैसला ‘जागत जोत सत्कार एक्ट संशोधन 2026’ को लेकर लिया गया है. पंजाब में बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने कानून को बेहद सख्त कर दिया है. अब बेअदबी करने वालों पर 5 लाख से लेकर 25 लाख रुपये तक का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाएगा. इतना ही नहीं, सजा का प्रावधान भी 10 साल से लेकर उम्रकैद तक कर दिया गया है.
अक्सर देखा जाता था कि आरोपी मानसिक कमजोरी का बहाना बनाकर बच निकलते थे, लेकिन अब यह पैंतरा काम नहीं आएगा. अब इन मामलों की जांच भी डीएसपी रैंक से ऊपर के अधिकारी ही करेंगे. चीमा ने अकाली दल पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके समय में ऐसी घटनाएं बढ़ीं, लेकिन अब कानून का डर कायम किया जाएगा. यह प्रस्ताव अब राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा.
पंजाब के मीठापुर और संसारपुर जैसे गांवों ने दुनिया को महान हॉकी खिलाड़ी दिए हैं. अब पहली बार पंजाब एशियन मैंस हॉकी टूर्नामेंट की मेजबानी करने जा रहा है. इसके लिए कैबिनेट ने करीब 25.40 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है. मैच जालंधर और मोहाली के विश्वस्तरीय मैदानों पर खेले जाएंगे और इनका सीधा प्रसारण भी होगा. सरकार का मानना है कि इससे पंजाब के युवाओं में खेलों के प्रति नया जोश भरेगा.
गांवों के विकास के लिए भी सरकार ने खजाना खोल दिया है. पंजाब के 1500 गांवों में करीब 3 लाख स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएंगी. खास बात यह है कि पहले इन लाइटों का 70% खर्च पंचायत को उठाना पड़ता था, जिसे अब सरकार ने पलट दिया है. अब 70% पैसा सरकार देगी और सिर्फ 30% हिस्सा पंचायतों को देना होगा. इस पूरी योजना पर होने वाले भारी-भरकम खर्च का बड़ा हिस्सा सरकार खुद वहन करेगी.
मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बीजेपी नेताओं रवनीत बिट्टू, तरुण चुग और सुनील जाखड़ को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे केंद्र सरकार से पंजाब के रुके हुए फंड (RDF और बाढ़ राहत राशि) जारी करवाएं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बाढ़ के समय बीजेपी नेताओं ने फोटोशूट तो खूब करवाए, लेकिन राहत के नाम पर एक रुपया भी केंद्र से नहीं दिलवाया. चीमा ने मांग की कि केंद्र सरकार भी धार्मिक ग्रंथों की सुरक्षा के लिए पंजाब की तरह सख्त कानून बनाए.
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-भारत एक्सप्रेस
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