Punjab Flood: पंजाब इस वक्त एक बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहा है. राज्य के 9 जिले भीषण बाढ़ की चपेट में हैं और करीब 1300 गांव पानी में डूब चुके हैं. सतलुज, ब्यास और रावी नदियां उफान पर हैं और पहाड़ी इलाकों से लगातार आ रहे पानी ने हालात को और गंभीर बना दिया है. अब तक 30 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, हजारों पशु बह गए हैं, लाखों लोग बेघर हो चुके हैं और फसलों को भारी नुकसान हुआ है.
तरनतारन, अजनाला, पठानकोट, फाजिल्का और अमृतसर जैसे जिलों में चारों तरफ सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा है. लोग सड़कों पर राहत शिविरों में या अपने घरों की छतों पर टेंट लगाकर दिन-रात गुजारने को मजबूर हैं. अजनाला जैसे बॉर्डर से लगे गांवों में हालात और भी खराब हैं. हालात यह हो चुका है कि राहत सामग्री की कमी है, मेडिकल सुविधाएं नहीं पहुंच पा रही हैं और लोगों के पास पहनने तक के कपड़े नहीं हैं.
एक महिला की कहानी सुनकर दिल को छू जाती है. 2023 में उन्होंने तीनका-तीनका जोड़कर घर बनाया था जो बाढ़ में बह गया. जैसे-तैसे फिर से घर लिया लेकिन 2025 की बाढ़ ने सबकुछ खत्म कर दिया. आंखों में आंसू लिए वो कहती हैं कि अब सारी जिंदगी इससे उभरने में लग जाएगी. ऐसी अनगिनत कहानियां हैं जो पंजाब के लोगों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगी.
बेजुबान जानवर भी इस त्रासदी का शिकार हुए हैं. सरकारी आंकड़ों में तो उनका जिक्र नहीं है लेकिन जिनके पशु बह गए, वो बताते हैं कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने उन्हें बहते देखा पर कुछ कर नहीं पाए. कुछ को बचा लिया लेकिन ज्यादातर पानी में समा गए.
फसलों का नुकसान भी बहुत बड़ा है. अब तक 94,061 हेक्टेयर फसल बर्बाद हो चुकी है जिसमें सबसे ज्यादा नुकसान मानसा जिले में हुआ है. मनसा जिले में17,005 हेक्टेयर की फसल बर्बाद हो गई है. इसके बाद कपूरथला, तरनतारन, फिरोजपुर और पठानकोट में भी भारी नुकसान हुआ है. मुख्य रूप से धान की फसल प्रभावित हुई है. सरकार ने इस बार 180 लाख मीट्रिक टन धान उत्पादन का लक्ष्य रखा था लेकिन अब यह पूरी तरह से खतरे में है.
राहत कार्यों में सरकार और सेना जुटी हुई है. भगवंत मान सरकार ने 129 राहत कैंप खोले हैं और 7,144 राहत शिविर अभी जारी हैं. 114 बोट्स, 1 हेलिकॉप्टर, NDRF की 20 टीमें, वायुसेना और थल सेना के 35 हेलिकॉप्टर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में लगे हैं. अब तक 15,688 लोगों को बाढ़ के पानी से निकाला जा चुका है.
एक परिवार की कहानी बताती है कि कैसे रात को सोते वक्त अचानक पानी आ गया. खुद को बचाना जरूरी था. हालात यह था कि सामान उठाने का वक्त ही नहीं मिल पाया. एक छोटी बच्ची रोते हुए कहती है कि उसकी और उसके भाई की किताबें बह गईं. वो यही नहीं रुकती है आगे कहती है कि सपने भी साथ बह गए.
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हालात बेहद खराब हैं लेकिन पंजाब के लोग कहते हैं,
“हमने बहुत कुछ झेला है पर कभी नहीं रुके हैं. ये दौर जो अभी चल रहा है वो भी गुजर जाएगा और जिंदगी फिर से पटरी पर आएगी.”
यही जज्बा है जो पंजाब को फिर से खड़ा करेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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