Rahul Gandhi Hydrogen Bomb Press Conference: दिल्ली के इंदिरा भवन स्थित कांग्रेस मुख्यालय गुरुवार को राहुल गांधी ने ‘हाइड्रोजन बम’ प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस बार राहुल का अंदाज़ पहले से अलग था. 7 अगस्त को हुई उनकी ‘एटम बम’ प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग पर तीखे हमले और यहां तक कि ‘गद्दार’ कह देने जैसी भाषा ने उन्हें आलोचना के घेरे में ला दिया था. लेकिन गुरुवार को मंच पर राहुल कहीं ज्यादा संयमित, रणनीतिक और सधे हुए नजर आए.
राहुल गांधी ने शुरुआत में ही माहौल साफ कर दिया. उन्होंने कहा, ‘मैं देशभक्त हूं, मुझे संविधान से प्रेम है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करता हूं. मैं जो भी कहूंगा, वो पूरी तरह से सबूतों पर आधारित होगा.’
यह बयान अपने आप में अहम था, क्योंकि पिछले कुछ महीनों से भाजपा लगातार उन पर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने और अराजकता फैलाने के आरोप लगाती रही है. इस बार राहुल ने चुनाव आयोग पर सवाल जरूर उठाए, लेकिन साथ ही संवैधानिक ढांचे के प्रति निष्ठा जताकर खुद को ‘संस्थाओं के खिलाफ’ नहीं बल्कि ‘संस्थाओं के सुधारक’ के रूप में पेश करने की कोशिश की.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर उन्होंने ‘लोकतंत्र के विनाशकों का संरक्षण’ करने का आरोप लगाया, लेकिन भाषा में उतनी तीख़ापन नहीं था जितना पिछली बार देखने को मिला था. यही नहीं, महादेवपुरा में एक लाख फर्जी वोटर की तरह तथ्यहीन दावों से बचते हुए इस बार उन्होंने सिर्फ कुछ खास उदाहरण दिए जैसे कर्नाटक के आलंद में 6,018 नाम हटने और महाराष्ट्र के राजूरा में संदिग्ध नाम जोड़ा.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के बीच अचानक राष्ट्रगान बजवाना एक ऐसा कदम था, जिसने सभी का ध्यान खींच लिया. आमतौर पर राजनीतिक कार्यक्रमों या यात्राओं में राष्ट्रगान बजता है, लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐसा होना असामान्य था. इसका असर साफ दिखा तकनीकी मुद्दा ‘वोट चोरी’ अचानक भावनात्मक रंग ले बैठा और इसे सीधे ‘राष्ट्रीय महत्व’ से जोड़ दिया गया.
दरअसल, भाजपा लंबे समय से राहुल पर ‘राष्ट्रविरोधी’ होने का आरोप लगाती रही है, खासकर 2023 में लंदन वाले उनके बयान के बाद जब उन्होंने कहा था कि भारत का लोकतंत्र खतरे में है. गुरुवार को राष्ट्रगान का प्रसारण कर राहुल ने उसी धारणा को काटने की कोशिश की. संदेश साफ था ‘मैं भारत माता का बेटा हूं, किसी विदेशी ताकत से नहीं डरता.’
हाल के दिनों में नेपाल में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद भाजपा ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे भारत में भी ऐसी ही अराजकता फैलाना चाहते हैं. सोशल मीडिया पर भी इस तरह के नैरेटिव को खूब हवा दी गई. शायद यही वजह थी कि राहुल ने इस बार अपने तेवरों में सावधानी बरती और बार-बार देशभक्ति व संवैधानिक निष्ठा पर जोर दिया. उनका मकसद साफ था इस विवाद से दूरी बनाना और यह साबित करना कि उनकी लड़ाई सत्ता या संस्थाओं को गिराने की नहीं, बल्कि लोकतंत्र को बचाने की है.
राहुल गांधी की ‘हाइड्रोजन बम’ प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबसे बड़ा बदलाव उनका अंदाज़ था. पहले वे जल्दबाजी में बड़े-बड़े आरोप लगाकर तुरंत चुनाव आयोग और मीडिया के फैक्ट-चेक के निशाने पर आ जाते थे. इस बार उन्होंने सीधे प्रमाण देने के बजाय चुनाव आयोग से ही डेटा और OTP की जानकारी मांगकर जवाबदेही का बोझ उसी पर डाल दिया. उनकी भाषा भी तुलनात्मक रूप से संयमित रही कम नारेबाजी, ज्यादा तथ्य और युवाओं को जागरूक करने पर फोकस.
कांग्रेस और राहुल के लिए यह रणनीतिक बदलाव बेहद जरूरी था. भाजपा लंबे समय से उन्हें ‘संस्थाओं का अपमान करने वाला’ और ‘विदेशी ताकतों के पक्ष में बोलने वाला’ बताती रही है. लेकिन गुरुवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल ने खुद को एक संवैधानिक मूल्यों के रक्षक, लोकतंत्र बचाने वाले और देशभक्त नेता के रूप में पेश किया.
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-भारत एक्सप्रेस
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