India Us Relations: वैश्विक तनाव और जटिल भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को एक नई ऊंचाई मिली है. नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके अमेरिकी समकक्ष मार्को रूबियो के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बेहद उपयोगी और व्यापक द्विपक्षीय वार्ता संपन्न हुई. इस बैठक ने साफ कर दिया कि दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक मुद्दों पर भी एक जैसी सोच रखते हैं.
इस हाई-प्रोफाइल बैठक की शुरुआत बेहद सकारात्मक रही. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की थी, जहां उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से पीएम मोदी को जल्द से जल्द व्हाइट हाउस आने का औपचारिक निमंत्रण सौंपा.
संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भारत के 5 सूत्रीय दृष्टिकोण (5-Point Agenda) को मजबूती से दुनिया के सामने रखा.
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत को अमेरिका का दुनिया के सबसे अहम रणनीतिक साझेदारों में से एक करार दिया. उन्होंने मीडिया से कहा कि मेरी इस यात्रा का उद्देश्य संबंधों को ‘पुनर्स्थापित’ या ‘रीसेट’ करना नहीं है, जैसा कि कुछ विश्लेषक कह रहे हैं. यह पहले से मौजूद एक बहुत मजबूत और ठोस रणनीतिक साझेदारी को और अधिक विस्तार देने के बारे में है.
रूबियो ने लोकतंत्र की ताकत का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों में स्वतंत्र मीडिया और विपक्ष की मौजूदगी नेताओं को जनता के प्रति जवाबदेह बनाती है. यही साझा लोकतांत्रिक मूल्य दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों को एक साथ जोड़ते हैं.
रक्षा और सुरक्षा: हाल ही में नवीनीकृत हुए 10-वर्षीय प्रमुख रक्षा साझेदारी समझौते और ‘पानी के नीचे डोमेन जागरूकता’ (Underwater Domain Awareness) के रोडमैप पर विस्तार से चर्चा हुई. जयशंकर ने जोर देकर कहा कि आगे बढ़ते हुए “मेक इन इंडिया” दृष्टिकोण और हालिया संघर्षों से मिले कूटनीतिक सबक अहम होंगे.
व्यापार और अर्थव्यवस्था: दोनों देशों ने अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने पर प्रतिबद्धता जताई, जो भविष्य में एक व्यापक व्यापार समझौते की नींव बनेगा. इसके साथ ही क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज), सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी.
ऊर्जा और परमाणु सहयोग: ‘शांति अधिनियम’ (Peace Act) के पारित होने से दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा सहयोग के नए रास्ते खुल गए हैं, जिससे भारत को अपने ऊर्जा व्यापार में विविधता लाने में मदद मिलेगी.
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सीमा पार और वैश्विक आतंकवाद के मुद्दे पर भारत ने अपना रुख एक बार फिर स्पष्ट किया. विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद के प्रति भारत की नीति “शून्य सहिष्णुता” (Zero Tolerance) की है. इस दौरान उन्होंने 26/11 मुंबई आतंकवादी हमलों के एक प्रमुख साजिशकर्ता के प्रत्यर्पण का भी विशेष उल्लेख किया. रूबियो ने सहमति जताते हुए कहा कि दोनों ही देश वैश्विक आतंकवादी नेटवर्कों के पीड़ित रहे हैं, इसलिए सुरक्षा एजेंसियों का आपसी तालमेल और अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ संयुक्त अभियान लगातार जारी रहेगा.
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