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गहरे कुएं में जा गिरा लेपर्ड, गुर्राने की आवाज सुनकर पहुंचे ग्रामीण; फिर ‘देसी जुगाड़’ से ऐसे बची जान

रिपोर्ट – गजेन्द्र लक्षकार


Salumbar Leopard Well Rescue: राजस्थान के सलूम्बर जिले में एक लेपर्ड ने ऐसी जगह छलांग लगा दी, जहां से बाहर निकलने का रास्ता उसे भी समझ नहीं आया. लसाड़िया क्षेत्र के दानितालाई वन इलाके में खाबड़ मार्ग पर बने एक गहरे और खुले कुएं में लेपर्ड जा गिरा. सुबह जब ग्रामीणों को कुएं के भीतर से हलचल और गुर्राने की आवाज सुनाई दी तो झांककर देखा. नीचे लेपर्ड बैठा था. इसके बाद गांव में यह खबर आग की तरह फैल गई.

ग्रामीणों ने बिना देर किए वन विभाग को सूचना दी. जब पुलिस की टीम मौके पर पहुंची तो कुएं के आसपास लोगों की भीड़ जमा थी. सबसे पहले अधिकारियों ने लोगों को पीछे हटाया और सुरक्षा घेरा बनाया. अधिकारियों के मुताबिक कुएं में फंसा लेपर्ड पहले से परेशान था, ऊपर भीड़ देखकर उसका गुस्सा और डर दोनों बढ़ सकते थे. इसकी वजह से वो हमला कर सकता था.

देसी जुगाड़ से लेपर्ड को निकाला गया बाहर

कुआं काफी गहरा था. ऐसे में न तो कोई कर्मचारी सीधे नीचे उतर सकता था और न ही लेपर्ड को रस्सी से बांधना संभव था. काफी सोच-विचार करने के बाद वन विभाग ने देसी जुगाड़ लगाया और कुएं में चारपाई उतार दी. ताकि लेपर्ड को बैठने और सहारा लेने के लिए मजबूत जगह मिल सके. इसके बाद विशेष पिंजरे की मदद से उसे धीरे-धीरे ऊपर लाने की तैयारी की गई.

रेस्क्यू के दौरान कभी लेपर्ड चारपाई पर चढ़ता, तो कभी बेचैनी में इधर-उधर घूमने लगता. टीम ने कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई. काफी मशक्कत के बाद आखिरकार लेपर्ड सुरक्षित पिंजरे में पहुंच गया और उसे कुएं से बाहर निकाल लिया गया. लेपर्ड के बाहर आते ही ग्रामीणों ने राहत की सांस ली.

लेपर्ड को भेजा गया बांसी नर्सरी

रेस्क्यू के बाद लेपर्ड को वन विभाग की बांसी नर्सरी भेजा गया, जहां डॉक्टर उसकी चोटों और स्वास्थ्य की जांच कर रहे हैं. वन अधिकारियों का कहना है कि पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उसे दोबारा जंगल में छोड़ दिया जाएगा.

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वन विभाग ने क्षेत्र के लोगों से अपील की है कि जंगलों के आसपास स्थित खुले कुओं को सुरक्षित ढकने या उनके चारों ओर सुरक्षा घेरा बनाने की व्यवस्था करें, ताकि भविष्य में वन्यजीव इस तरह की दुर्घटनाओं का शिकार न हों. यह सफल रेस्क्यू वन्यजीव संरक्षण के प्रति विभाग की तत्परता और संवेदनशीलता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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