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सिर्फ कलाकृति नहीं, सांस्कृतिक पहचान हैं ये रंग! दिल्ली में सजी ‘रंगमंजूषा’ प्रदर्शनी, Bharat Express पर संस्कार भारती की झलक

SANSKAR BHARATI RANGMANJUSHA EXHIBITION: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में संस्कार भारती की ओर से आयोजित पांच दिवसीय ‘रंगमंजूषा’ कला प्रदर्शनी का भव्य समापन हुआ. इस प्रदर्शनी में देश की समृद्ध पारंपरिक कला, लोक संस्कृति और पौराणिक धरोहर के विविध रूप देखने को मिले.

भारत एक्सप्रेस की ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए कैसे रंगों और रेखाओं के जरिए कलाकारों ने भारतीय जड़ों और सनातन परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास किया..

रिपोर्ट: स्कंदिता, भारत एक्सप्रेस


राजधानी दिल्ली में कला, संस्कृति और सनातन परंपरा को समर्पित संस्था संस्कार भारती द्वारा आयोजित पांच दिवसीय ‘रंगमंजूषा’ कला प्रदर्शनी का बुधवार को औपचारिक समापन हो गया. पांच दिनों तक चली इस अनूठी प्रदर्शनी में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों ने अपनी प्रतिभा और कृतियों के जरिए भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों को कैनवास पर साकार किया.

प्रदर्शनी में रंगों और रेखाओं की बारीक कारीगरी के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण, भारतीय लोक जीवन, उत्सवों और पारंपरिक शिल्पकला की सजीव प्रस्तुतियां देखने को मिलीं, जिसने कला प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया.

‘कला सिर्फ तस्वीर नहीं, हमारी पीढ़ियों की पहचान है’

प्रदर्शनी में भाग ले रहे कलाकारों ने ‘भारत एक्सप्रेस’ से बातचीत करते हुए कहा कि पारंपरिक कला महज एक पेंटिंग या सजावटी वस्तु नहीं है, बल्कि यह पीढ़ियों से चली आ रही हमारी सांस्कृतिक अस्मिता और जीवन दर्शन का प्रतीक है. कलाकारों ने बताया कि आधुनिकता की होड़ में जब पारंपरिक विधाएं हाशिए पर जा रही हैं, ऐसे समय में ‘रंगमंजूषा’ जैसे मंच उन्हें अपनी कला को जन-जन तक पहुंचाने और सीधे दर्शकों से संवाद स्थापित करने का सशक्त अवसर देते हैं.

युवा पीढ़ी को जड़ों से जोड़ने का प्रयास: अभिजीत गोखले

समापन समारोह के अवसर पर संस्कार भारती के अखिल भारतीय संगठन मंत्री अभिजीत गोखले ने इस आयोजन की सार्थकता पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि ‘रंगमंजूषा’ का मुख्य उद्देश्य लुप्तप्राय और पारंपरिक कला विधाओं को राष्ट्रीय स्तर पर एक मंच प्रदान करना है, ताकि आम जनमानस और विशेष रूप से आज की युवा पीढ़ी अपनी ऐतिहासिक व सांस्कृतिक जड़ों से गहराई से जुड़ सके. उन्होंने इस प्रदर्शनी को भारतीय कला परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया.

कैनवास पर बिखरे ये रंग और बनाई गई कलाकृतियां केवल दृश्य सौंदर्य तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये भारत की उस सनातन परंपरा की कहानी बयां करती हैं जो सदियों से हमारी पहचान रही है. कला प्रेमियों और संस्कृति के संरक्षकों ने इस आयोजन की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि ऐसे सांस्कृतिक प्रयास देश की रचनात्मक चेतना को निरंतर समृद्ध करते रहेंगे.

यह भी पढ़िए: संस्कार भारती के ‘कला संकुल’ में कथक पर विशेष कला संगोष्ठी: गौरी दिवाकर ने साझा किए कला-यात्रा के अनुभव

Bharat Express Desk

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