आज के दौर में जब पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर हैरत में है, भारत इस रेस में सिर्फ शामिल ही नहीं होना चाहता, बल्कि नेतृत्व करना चाहता है. हाल ही में ‘सर्वम एआई’ (Sarvam AI) के को-फाउंडर प्रत्यूष कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी मुलाकात का कुछ किस्सा साझा किया हैं. ‘मोदी स्टोरी’ में अपनी बात रखते हुए उन्होंने बताया कि पीएम मोदी के लिए एआई सिर्फ एक फैंसी तकनीक या ‘बजवर्ड’ नहीं है, बल्कि यह करोड़ों भारतीयों की जिंदगी बदलने का एक जरिया है.
प्रत्यूष कुमार के मुताबिक, प्रधानमंत्री के साथ हुई उनकी चर्चा काफी गहरी और स्पष्ट थी. पीएम मोदी का मानना है कि भारत में एआई केवल सेमिनारों और चर्चाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. उनका साफ कहना है कि तकनीक का असली फायदा तब है जब उसका ‘ठोस और मापनीय प्रभाव’ (Scalable Impact) दिखाई दे.
सरकार चाहती है कि एआई का इस्तेमाल फाइलों से निकलकर खेतों और क्लासरूम तक पहुंचे. पीएम मोदी भारत को एक ऐसे पॉजिटिव अडॉप्टर के रूप में देखते हैं, जो तकनीक को अपनाने में हिचकिचाता नहीं है, बल्कि उसे आम आदमी के कल्याण के लिए ढाल लेता है.
प्रत्यूष ने कहा कि प्रधानमंत्री एआई को लेकर बहुत बड़े स्तर पर सोच रहे हैं. वे चाहते हैं कि भारत एआई के ग्लोबल मैप पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराए. पीएम का लक्ष्य सिर्फ भारत में एआई से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करना नहीं है, बल्कि वो चाहते हैं कि दुनिया इसे “भारत का आयोजन” माने. इसका मतलब है कि हम ऐसे समाधान (Solutions) विकसित करें जो न केवल हमारी जरूरतों को पूरा करें, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बनें.
प्रधानमंत्री ने बातचीत के दौरान डिजिटल इंडिया, यूपीआई (UPI) और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) का उदाहरण भी दिया. उन्होंने समझाया कि जिस तरह इन तकनीकों ने बिचौलियों को खत्म कर सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लोगों के बैंक खातों तक पहुंचाया, ठीक उसी तरह एआई भी ज्ञान और सेवाओं को सीधे नागरिकों तक पहुंचा सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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