टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कोलकाता के सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एसआरएफटीआई) में हुई झड़प को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि इस तरह की घटना की निंदा होनी चाहिए. सौगत रॉय के मुताबिक, केंद्र सरकार के अधीन आने वाले इस प्रतिष्ठित संस्थान में बाहर से लोगों को बुलाकर हमला किया गया.
उन्होंने दावा किया कि इस घटना में एबीवीपी से जुड़े लोगों की भूमिका थी. हालांकि, एबीवीपी पहले ही घटना में किसी तरह की भागीदारी से इनकार कर चुका है. इस पर सौगत रॉय ने कहा कि उन्हें पूरे मामले की विस्तृत जानकारी नहीं है, लेकिन जिस संगठन का कार्यक्रम संस्थान के ऑडिटोरियम में चल रहा था, उसके बीजेपी से संबंध बताए जा रहे हैं. उनका आरोप है कि इसी संगठन की ओर से बाहर से लोगों को बुलाया गया.
एसआईआर के मुद्दे पर भी सौगत रॉय ने अपनी बात रखी. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समर्थन में बीजेपी नेताओं के सामने आने पर सवाल उठाया. उनका कहना था कि विपक्ष लगातार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा रहा है.
सौगत रॉय ने कहा कि विपक्ष का आरोप है कि एसआईआर के मामले में चुनाव आयोग की भूमिका और उसके इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं. उन्होंने साफ किया कि इस मुद्दे पर विपक्ष अपने रुख पर कायम है और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर सवाल आगे भी उठाए जाते रहेंगे.
30 सितंबर को प्रस्तावित इंडिया ब्लॉक की बैठक को लेकर सौगत रॉय ने बताया कि इसकी पहल सीपीएम के सचिव की ओर से हुई थी. उन्होंने ममता बनर्जी से बातचीत की थी. इसके बाद ममता बनर्जी ने राहुल गांधी से बात की और राहुल गांधी के आह्वान पर बैठक बुलाने का फैसला हुआ.
सौगत रॉय के मुताबिक, इस बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी दोनों शामिल होंगे.
नेताजी इंडोर स्टेडियम में हुए गीता पाठ कार्यक्रम के दौरान बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी के बयान पर भी सौगत रॉय ने प्रतिक्रिया दी. सुवेंदु अधिकारी ने कहा था कि बंगाल में संतों का अपमान करने पर जेल जाना पड़ सकता है.
सौगत रॉय ने कहा कि किसी संत का अपमान नहीं किया जाना चाहिए, इस बात से वह सहमत हैं. लेकिन उनका कहना है कि किसी संत की चर्चा या आलोचना करने पर किसी व्यक्ति को जेल भेजना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिहाज से उचित नहीं होगा.
उन्होंने कहा कि अगर सरकार आलोचना रोकने के लिए जेल जैसे कदम का इस्तेमाल करती है, तो इससे लोकतंत्र से जुड़े सवाल खड़े होंगे.
टीएमसी नेता हुमायूं कबीर की उस टिप्पणी पर भी सौगत रॉय ने असहमति जताई, जिसमें उन्होंने सुवेंदु अधिकारी की मौत की कामना की थी. सौगत रॉय ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की मौत की कामना करना सही नहीं है, चाहे वह सुवेंदु अधिकारी हों या कोई और हों.
उन्होंने माना कि हुमायूं कबीर जिस स्थिति और कथित अत्याचार के खिलाफ आवाज उठा रहे थे, उससे वह नाराज या हताश हो सकते हैं. लेकिन इसके बावजूद इस तरह की टिप्पणी को उचित नहीं ठहराया जा सकता.
टीएमसी विधायक कुणाल घोष पर हुए कथित हमले को लेकर भी सौगत रॉय ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने घटना की निंदा करते हुए कहा कि पुलिस को इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए.
उनका आरोप है कि पुलिस इस मामले में कुछ नहीं कर रही है और यह किसी की आवाज दबाने की कोशिश जैसा है. सौगत रॉय ने कहा कि ऐसी कोशिश सफल नहीं होगी. उन्होंने कहा कि मामले की जांच करना और जरूरी कार्रवाई करना पुलिस की जिम्मेदारी है, इसलिए पुलिस को इस घटना को गंभीरता से लेते हुए कदम उठाना चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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