रिपोर्ट-शकील अहमद सिद्दीकी
MP Health System: मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था किस कदर ‘हाई-टेक’ और आत्मनिर्भर हो चुकी है, इसका एक जीता-जागता और रोंगटे खड़े कर देने वाला उदाहरण सिंगरौली जिले से सामने आया है. सूबे की ग्रामीण पंचायत मंत्री राधा सिंह के अपने ही विधानसभा क्षेत्र चितरंगी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) से एक ऐसा वीडियो वायरल हुआ है, जिसे देखने के बाद यमराज भी अपनी नौकरी को लेकर खतरे में आ जाएं.
बता दें कि अस्पताल में भर्ती लाचार मरीजों को डॉक्टर या क्वालिफाइड नर्स नहीं, बल्कि वहां तैनात ‘सिक्योरिटी गार्ड’ अपनी जांबाज उंगलियों से सुइयां (इंजेक्शन) और ग्लूकोज की बोतलें चढ़ा रहा है. वीडियो इंटरनेट पर तैरने के बाद जिले के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है.
इस ताज़ातरीन मामले ने सिंगरौली की बदहाल और वेंटिलेटर पर पड़ी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का कच्छा-चिट्ठा चौराहे पर फाड़ दिया है. वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि खाकी वर्दी पहने अस्पताल का सुरक्षाकर्मी पूरे आत्मविश्वास के साथ मरीजों के वार्ड में घूम रहा है.
उसका काम वैसे तो केवल लाठी चमकाना और हुड़दंगियों को रोकना था, लेकिन सिस्टम की मेहरबानी देखिए कि वह मरीजों की नसों में सुइयां घुसा रहा है. जनता अब हैरान है कि इस अद्भुत इलाज के लिए गार्ड को अलग से ‘कंसल्टेशन फीस’ देनी पड़ रही है या यह सुरक्षा ड्यूटी का ही हिस्सा है?
चितरंगी की जनता के लिए यह गर्व की बात हो सकती है कि उनके यहां के अस्पताल का स्टाफ इतना ‘मल्टीटैलेंटेड’ है, लेकिन असलियत यह है कि यह लापरवाही मरीजों की जिंदगी के साथ सीधा खिलवाड़ है. रसूखदार मंत्री राधा सिंह के क्षेत्र का यह हाल तब है, जब सरकार हर मंच से स्वास्थ्य बजट और सुविधाओं के ढोल पीटती नहीं थकती.
स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉक्टरों की कमी और स्टाफ की घोर लापरवाही के चलते अब मरीजों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है. जब रक्षक ही भक्षक की तरह आधी-अधूरी जानकारी के साथ सुइयां चुभाने लगे, तो अस्पताल और कबाड़खाने में क्या फर्क रह जाता है?
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जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू किया, स्वास्थ्य विभाग के बड़े अफसरों की नींद टूटी. हमेशा की तरह अब इस मामले में भी ‘कमेटी बनाकर जांच कराने’ और ‘दोषियों पर सख्त कार्रवाई’ का पुराना घिसा-पिटा सरकारी राग अलापा जा रहा है.
कानूनी जानकारों और जनता का साफ कहना है कि जब तक जमीनी स्तर पर डॉक्टरों की तैनाती नहीं होगी, तब तक ऐसे ‘जुगाड़ू डॉक्टर्स’ और ‘कमांडो नर्स’ मरीजों को इसी तरह बोतल चढ़ाते रहेंगे.
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-भारत एक्सप्रेस
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