दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय (SAU) में बुधवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर मेस में परोसे जाने वाले भोजन को लेकर दो छात्र गुटों के बीच झड़प हो गई. यह विवाद उस समय बढ़ गया जब कुछ छात्रों ने विश्वविद्यालय के मेस में परोसे जा रहे मांसाहारी भोजन पर आपत्ति जताई.
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में दिखाया गया कि मेस में कुछ छात्रों के बीच तीखी बहस हुई, जो बाद में हाथापाई में बदल गई. घटना में एक महिला छात्रा भी शामिल थी, जिसे कथित तौर पर धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ा.
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक विश्वविद्यालय के एक द्वितीय वर्ष के मास्टर्स छात्र के अनुसार, जो गुमनाम रहना चाहते थे, ABVP (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) से जुड़े छात्रों ने एक दिन पहले यह मांग की थी कि महाशिवरात्रि के अवसर पर केवल शाकाहारी भोजन ही परोसा जाए.
छात्र ने बताया, “विश्वविद्यालय में दो मेस हैं. आज, उनमें से एक में मछली करी परोसी जा रही थी. इसी दौरान कुछ छात्र, जो कथित रूप से एबीवीपी से जुड़े थे, वहां पहुंचे और मछली करी हटाने की कोशिश की. जब मेस कमेटी की एक महिला सदस्य ने इसका विरोध किया, तो उन्होंने उसके साथ बदसलूकी की.”
एबीवीपी ने ‘आतंकवाद’ करार दिया, तो SFI ने लगाया हिंसा भड़काने का आरोप
एबीवीपी के प्रदेश सचिव सार्थक शर्मा ने इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा मामला बताते हुए कहा, “छात्रों को अपने धार्मिक विश्वासों और परंपराओं का पालन करने का अधिकार है और इस अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए. जब विश्वविद्यालय प्रशासन ने खुद सत्त्विक भोजन की व्यवस्था की थी, तब जबरदस्ती मांसाहारी भोजन परोसना न केवल असंवेदनशील है बल्कि वैचारिक आतंकवाद भी है.”
उन्होंने इस घटना की निंदा करते हुए प्रशासन से मांग की कि उन छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए जिन्होंने विश्वविद्यालय का माहौल खराब किया, उपवास कर रहे छात्रों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया और हिंसा को बढ़ावा दिया.
दूसरी ओर छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने एबीवीपी पर हिंसा भड़काने और छात्रों पर अपनी विचारधारा थोपने का आरोप लगाया.
एसएफआई ने अपने बयान में कहा, “एबीवीपी के सदस्यों ने विश्वविद्यालय मेस में छात्रों पर हमला किया क्योंकि उन्होंने उनकी तानाशाही और अलोकतांत्रिक मांग को मानने से इनकार कर दिया कि महाशिवरात्रि के दिन मांसाहारी भोजन न परोसा जाए.”
एसएफआई ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस घटना पर संज्ञान लेने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की. संगठन ने इसे धर्मनिरपेक्षता और छात्र अधिकारों पर हमला करार दिया.
इस घटना ने विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. एक ओर, प्रशासन ने सत्विक भोजन की व्यवस्था की थी, वहीं दूसरी ओर, मांसाहारी भोजन भी उपलब्ध था. ऐसे में यह विवाद प्रशासन की नीतियों की अस्पष्टता को दर्शाता है.
फिलहाल, छात्र संगठन इस मामले पर अलग-अलग बयान दे रहे हैं, जिससे विश्वविद्यालय परिसर में तनाव बढ़ गया है. अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस विवाद को शांत करने के लिए क्या कदम उठाता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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