देश

‘सूखी रोटी पानी में भिगोकर खाते थे’, पुण्यतिथि पर सुंदर सिंह भंडारी को याद कर भावुक हुए अमित शाह

जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में शामिल और प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक सुंदर सिंह भंडारी (Sundar Singh Bhandari) की पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है. इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने उनके संघर्षपूर्ण जीवन को याद करते हुए बताया कि आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए उन्होंने कठिन परिस्थितियों का सामना किया. शाह ने कहा कि कई बार भोजन तक नहीं मिलता था, तो वे सूखी रोटी को पानी में भिगोकर खा लेते थे, लेकिन अपने सिद्धांतों और विचारों से कभी समझौता नहीं किया. उनका जीवन आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है.

अमित शाह ने क्या कहा?

सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा, “जनसंघ के संस्थापक सदस्य, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक सुंदर सिंह भंडारी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि. जनसंघ के प्रमुख स्तंभ सुंदर सिंह भंडारी ने भाजपा के संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वे संगठन के ऐसे शिल्पकार थे, जिन्होंने व्यक्ति, समाज और संगठन की प्रतिभाओं को निखारने और गढ़ने का कार्य किया. आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनका संघर्ष व विपरीत परिस्थितियों में भी सिद्धांतों से समझौता न करने का उनका संकल्प हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है.”

अमित शाह ने आगे कहा कि, “सुंदर सिंह भंडारी गुजरात के राज्यपाल थे. स्वाभाविक रूप से विद्यार्थी परिषद और युवा मोर्चा के कार्यकर्ता उनके पास आते-जाते रहते थे. उनमें से एक मैं भी था. भंडारी जी का गुजरात से भी रिश्ता है. एक दिन बैठे थे और मैंने ऐसे ही पूछ लिया कि आपके पैर को क्या हो गया है. उन्होंने बात को हंसकर टाल दिया था. तब मैंने उनसे फिर से पूछा था तो उन्होंने बोला था कि इस बात को कहीं नहीं बताना है.”

‘वें सूखी रोटी पानी में भिगोकर खाते थे’- अमित शाह

गृह मंत्री ने आगे कहा, “आज वह शख्सियत इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उनका वो वाक्य और जानकारी हम सबको प्रेरणा देती है. उन्होंने बताया था कि जब वे राजस्थान में संघ का कार्य कर रहे थे, तब काम की स्वीकृति बहुत कम थी. हर जगह पर खाना नहीं मिलना था. संघ कार्यालय पर जब आते थे, तब रोटियों को कपड़ों की तरह सुखाते थे. सूखी हुई रोटियों को कपड़े में लपेट कर उन्हें थैले में डालकर वह साइकिल पर संघ का कार्य करते थे और गांव-गांव घूमते थे.”


ये भी पढ़ें: ‘स्वस्थ और दीर्घायु रहें थिरु विजय…’; तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय थलापति के जन्मदिन पर प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई


अमित शाह ने बताया कि “उस समय साइकिल चलाने के कारण पैर की पिंडलियां चौड़ी हो गई थीं. जब भोजन नहीं मिलता था तो सूखी रोटी को पानी में भिगोकर उसे खाते थे और आगे संघ का कार्य करने के लिए निकलते थे. इस प्रकार के तपस्वी जीवन से उन्होंने संघ को आगे बढ़ाया. आज भी मैं उस वाक्य को याद करता हूं तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं.”

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

Recent Posts

क्या CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में उतरे अवैध बंग्लादेशी? जानें क्या है वायरल वीडियो का सच

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जोड़ते हुए दावा किया जा रहा है कि मुंबई…

21 minutes ago

श्रावस्ती में शटडाउन के बावजूद हाईटेंशन लाइन में आया करंट, 2 ग्रामीणों की मौत

श्रावस्ती में शटडाउन के बावजूद 11 हजार वोल्ट की बिजली लाइन चालू होने से दो…

53 minutes ago

‘सेवा संकल्प’ कार्यक्रम में एक मंच पर आए देश-दुनिया के दिग्गज, पीएम मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन पर चर्चा

नई दिल्ली में आयोजित ‘सेवा संकल्प – राष्ट्रनिर्माण के 25 साल’ समारोह में सेवा, सद्भाव…

2 hours ago

नाना पाटेकर की पत्नी नीलकांति पाटेकर कौन हैं, 35 साल से क्यों हैं अलग? जानिए उनकी जिंदगी, करियर और रिश्ते की पूरी कहानी

नाना पाटेकर के निधन के बाद उनकी पत्नी नीलकंती पाटेकर चर्चा में हैं. जानिए मराठी…

2 hours ago

जंतर-मंतर प्रदर्शन: यूथ कांग्रेस की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट आज करेगा सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन की अनुमति न मिलने के…

2 hours ago