सुप्रीम कोर्ट ने अन्ना यूनिवर्सिटी की 19 साल की छात्रा के यौन उत्पीड़न के मामले में दर्ज एफआईआर लीक पर तमिलनाडु पुलिस के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट के निदेशों पर रोक लगा दिया है. मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु पुलिस को एफआईआर लीक होने होने के बाद विभागीय जांच का आदेश दिया था. जस्टिस वीबी नागरत्ना और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने एफआईआर लीक को लेकर मद्रास हाईकोर्ट द्वारा की गई टिप्पणियों पर रोक लगा दिया है.
मद्रास हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कि राजनीतिक दलों ने इस मामले के विरोध प्रदर्शन का इस्तेमाल मीडिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए किया है न कि मामले के प्रति कोई असल चिंता जताने के लिए. कोर्ट ने कहा था कि कि पूरे प्रकरण पर हम सबको शर्म आनी चाहिए. कोर्ट ने कहा कि सिर्फ राजनीति हो रही हैं. महिलाओं की सुरक्षा पर कोई वास्तविक ध्यान नहीं दिया जा रहा है.
मद्रास हाईकोर्ट ने एसआईटी जांच का आदेश दिया था. साथ ही कोर्ट ने तमिलनाडु पुलिस की वेबसाइट पर प्रकाशित एफआईआर में पीड़िता का विवरण सार्वजनिक करने में पुलिस की ओर से हुई चूक के लिए पीड़िता को 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दिया था. साथ ही कोर्ट ने पीड़िता और उसके परिवार को सुरक्षा प्रदान करने का भी निर्देश दिया था.
बता दें कि 23 दिसंबर को 19 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्रा के साथ अन्ना यूनिवर्सिटी परिसर में कथित रूप से यौन शोषण किया गया था. पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि आरोपी ने पहले उसके पुरुष मित्र पर हमला किया और उसके बाद झाड़ियों में ले जाकर उसका यौन शोषण किया. जिसके बाद पीड़िता की शिकायत पर इस मामले में पुलिस ने एक आदमी को गिरफ्तार किया है. जबकि दूसरे की तलाश की जा रही हैं. पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी ज्ञान शेखरण बिरयानी बिक्रेता है. जांच के दौरान वैज्ञानिक साक्ष्य के आधार पर इसे कोट्टम से गिरफ्तार किया गया है.
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