तेलंगाना में वोटर लिस्ट से 73 लाख नाम हटने पर भड़की कांग्रेस
Telangana SIR News: तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ ने मंगलवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत प्रारूप मतदाता सूची से 73 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयोग की आलोचना की.
उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के नाम पर चुनाव आयोग ने मनमाने तरीके से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए हैं.
महेश कुमार गौड़ ने दावा किया कि 2014 से केंद्र की भाजपा सरकार संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है. उन्होंने कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की तरह चुनाव आयोग भी भाजपा का सहयोगी संगठन बन गया है.
टीपीसीसी अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव आयोग के नियमों के कारण गरीब लोग अपने मतदान के अधिकार से वंचित हो रहे हैं. उन्होंने सवाल किया, “आपको इस देश में जन्मे नागरिकों के वोट हटाने का अधिकार किसने दिया?”
उन्होंने 73 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आलोचना करते हुए यह भी पूछा कि अलग-अलग श्रेणियों में रखे गए अन्य 92 लाख लोग अभी भी मतदाता सूची में क्यों बने हुए हैं.
महेश कुमार गौड़ ने कहा कि परिसीमन और मतदान केंद्रों में बदलाव के कारण कई परिवारों के पास वर्ष 2002 के एसआईआर से जुड़े रिकॉर्ड नहीं हैं. उन्होंने पूछा कि लोग इतने पुराने दस्तावेज कहां से लाएंगे, जबकि वे सभी भारत में जन्मे हैं और कई बार मतदान भी कर चुके हैं.
उन्होंने कहा कि मतदाताओं के पास 2002 के एसआईआर का विवरण हो या न हो, उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए. उन्होंने प्रत्येक पात्र मतदाता के मतदान अधिकार की रक्षा करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की.
टीपीसीसी अध्यक्ष ने मांग की कि सभी मामलों की गहन जांच के लिए चुनाव आयोग एसआईआर की समय सीमा बढ़ाए.
उन्होंने आरोप लगाया कि बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) ने घर-घर जाकर गणना फॉर्म वितरित नहीं किए. उनका दावा है कि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनमें अधिकांश गरीब और प्रवासी मजदूर हैं.
बता दें कि चुनाव आयोग ने सोमवार को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की थी. इसमें 73.3 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिन्हें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट श्रेणी में रखा गया था.
इसके अलावा, 92.8 लाख मतदाताओं को भी चिह्नित किया गया है, जिनके गणना विवरण में विसंगतियां पाई गई हैं या जिनका रिकॉर्ड पूरी तरह मैप नहीं हो सका है.
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आंकड़ों के अनुसार, प्रारूप सूची से हटाए गए 73.3 लाख मतदाताओं में से करीब 43 लाख हैदराबाद तथा उससे सटे रंगारेड्डी और मेडचल-मलकाजगिरी जिलों के हैं.
(IANS के इनपुट पर आधारित)
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