Twisha Sharma Case In Supreme Court: ग्लैमर वर्ल्ड से जुड़ी 33 वर्षीय मॉडल ट्विशा शर्मा (दिव्या) की भोपाल के कटारा हिल्स में हुई संदिग्ध मौत का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत पहुंच गया है. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति बागची की बेंच ने इस संवेदनशील मामले पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए सुनवाई की. कोर्ट ने जहां एक ओर इस मौत को समाज के लिए बेहद ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया, वहीं यह भी स्पष्ट किया कि अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच ‘केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो’ (CBI) के हाथों में सौंप दी गई है.
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत (CJI Surya Kant On Twisha Sharma Case) ने बताया कि उन्होंने 18 मई को इंडिया टुडे में छपी एक रिपोर्ट के आधार पर खुद इस मामले पर संज्ञान लिया है. इस रिपोर्ट में न्यायपालिका पर संस्थागत पूर्वाग्रह (Institutional Bias) के सवाल उठाए गए थे. कोर्ट ने साफ किया कि न्यायपालिका कभी भी किसी मामले की निष्पक्ष जांच में आड़े नहीं आती. CJI ने कहा-
“यह नैरेटिव बनाया गया कि मृतका का पति एक वकील है और सास एक पूर्व जिला जज हैं, इसलिए जांच में न्यायपालिका का अनुचित प्रभाव डाला जा रहा है और निष्पक्ष जांच नहीं हो रही है. इस तरह के आरोपों से हमें काफी पीड़ा और तकलीफ हुई है.”
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने ट्विशा की सास और पूर्व जज गिरिबाला सिंह के रवैये पर कड़े सवाल उठाए. उन्होंने कोर्ट को बताया कि पूर्व जज जांच में सहयोग करने के बजाय अलग-अलग टीवी चैनलों पर जाकर मृतका (ट्विशा) की छवि खराब करने की कोशिश कर रही हैं.
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इसी दौरान SG मेहता ने एक बेहद भावुक टिप्पणी करते हुए कहा, “इस पूरी कहानी का नैतिक सार (Moral) यही है कि माता-पिता के लिए एक मृत बेटी होने के बजाय, एक तलाकशुदा बेटी होना कहीं ज्यादा बेहतर है.”
ट्विशा के परिवार की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत में गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि आरोपी के रसूख (पूर्व जज) के कारण FIR दर्ज होने में तीन दिन की देरी की गई और साक्ष्यों (सबूतों) को सुरक्षित रखने में भारी लापरवाही बरती गई. लूथरा ने अंदेशा जताया कि हर गुजरते दिन के साथ सबूत नष्ट होने का खतरा बना हुआ है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा जांच तुरंत CBI को सौंपे जाने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अब इसमें अदालत के दखल की जरूरत नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चल रहे मीडिया ट्रायल पर गहरी नाराजगी जताई. अदालत ने मीडिया से गुजारिश की कि वे परिवार और गवाहों के बयानों को प्रसारित कर कयासबाजी न करें. साथ ही, CJI ने दोनों पक्षों (मायके और ससुराल) को सख्त हिदायत दी कि वे पब्लिक डोमेन या चैनलों पर बयानबाजी करने के बजाय, सीबीआई (CBI) जैसी देश की प्रमुख जांच एजेंसी के सामने अपना पक्ष रखें. अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट में होने वाली आरोपी पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला की जमानत याचिका की सुनवाई पर टिकी हैं.
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