Karnataka Congress Leadership Crisis: दक्षिण भारत में कांग्रेस के सबसे मजबूत गढ़ कर्नाटक के सियासी गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है. दिल्ली के कूटनीतिक हलकों में कर्नाटक के ‘निजाम’ यानी मुख्यमंत्री को बदलने की स्क्रिप्ट तैयार की जा रही है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार और गृह मंत्री जी परमेश्वर अचानक दिल्ली तलब किए गए हैं, जहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर राहुल गांधी की मौजूदगी में एक हाई-प्रोफाइल बैठक होने जा रही है.
2023 में मिली प्रचंड जीत के बाद उपजा अंदरूनी पावर-स्ट्रगल अब अपने अंतिम मुकाम पर पहुंच गया है. क्या सिद्धारमैया की कुर्सी बची रहेगी, या डीके शिवकुमार का ‘ढाई साल का वादा’ पूरा होगा? आइए समझते हैं दिल्ली की मेज पर रखे उन 3 सबसे बड़े समीकरणों (Karnataka CM Change News) को, जो कर्नाटक का भविष्य तय करेंगे.
मई 2023 में जब सरकार बनी थी, तब वोक्कलिगा समुदाय के सबसे कद्दावर नेता डीके शिवकुमार को ढाई साल बाद सीएम बनाने का गुप्त भरोसा दिया गया था. साथ ही उन्हें केरल चुनावों के बाद इस वादे को पूरा करने की बात कही गई थी. चूंकि केरल के चुनाव संपन्न हो चुके हैं, इसलिए डीके गुट अब आक्रामक है.
मजबूत पक्ष: डीके शिवकुमार पार्टी के संकटमोचक हैं, संगठन पर मजबूत पकड़ रखते हैं और वोक्कलिगा वोट बैंक को जेडीएस-बीजेपी गठबंधन से खींचने की क्षमता रखते हैं.
पेच: उन पर चल रहे भ्रष्टाचार के मामले और सिद्धारमैया गुट का आंतरिक विरोध उनके रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा है.
मौजूदा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की उम्र 78 साल हो चुकी है, जो अगले चुनाव (2028) तक 80 के पार होगी. राज्य में सत्ता-विरोधी लहर (Anti-Incumbency) बढ़ रही है, जिसके कारण आलाकमान समय रहते बदलाव चाहता है.
सिद्धारमैया का काउंटर-प्लान: सिद्धारमैया आसानी से कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं. वह अपने साथ गृह मंत्री जी परमेश्वर को दिल्ली लेकर आए हैं. अगर सिद्धारमैया को हटना भी पड़ा, तो वह डीके शिवकुमार का रास्ता रोकने के लिए राज्य के पहले ‘दलित मुख्यमंत्री’ के तौर पर जी परमेश्वर के नाम की पैरवी कर कूटनीतिक चाल चल सकते हैं.
ऑफर: पद छोड़ने के बदले सिद्धारमैया को दिल्ली में राज्यसभा सीट और उनके बेटे को कर्नाटक कैबिनेट में अहम पद का ऑफर दिया जा सकता है.
अगर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच की जंग में आम सहमति नहीं बनी, तो कांग्रेस आलाकमान के पास ‘तीसरा रास्ता’ बेहद चौंकाने वाला है. वह नाम खुद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का है.
वरिष्ठता की ताकत: खड़गे कर्नाटक के ही रहने वाले हैं और उनकी वरिष्ठता पर कोई भी गुट उंगली नहीं उठा सकता. एक वरिष्ठ दलित चेहरे को सीएम बनाकर कांग्रेस पूरे देश में बड़ा संदेश दे सकती है.
पेच: खड़गे की उम्र 83 वर्ष है. यदि वह कर्नाटक जाते हैं, तो दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता विपक्ष का पद खाली हो जाएगा, जिससे कांग्रेस का राष्ट्रीय ढांचा प्रभावित होगा.
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यदि राहुल गांधी और खड़गे इस गुटबाजी को शांत करने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाते हैं, तो अंतिम विकल्प के तौर पर सिद्धारमैया को पद पर बनाए रखा जाएगा, लेकिन उनके पंख कतरने के लिए कैबिनेट में बड़े पैमाने पर फेरबदल किया जाएगा. खराब रिपोर्ट कार्ड वाले मंत्रियों की छुट्टी होगी और डीके शिवकुमार को थोड़ा और इंतजार करने के लिए मनाया जाएगा. दिल्ली की इस बैठक से जो भी फैसला निकलेगा, उसका सीधा असर 2028 के विधानसभा चुनाव पर पड़ना तय है. cannes 2026 sandip patel, ipl players, padmini ekadashi 2026, us iran war news, kbm, लाहौर, plus two result 2026, 26 may 2026, ఇరాన్, hfcl share price, rajpal yadav, apollo micro systems share price, h-1b వీసా, ipl time, lic share price, ferrari luce, pine labs share, india mart, kcet 2026 result date, cng price in delhi
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