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क्या BRICS में हो पाएगी पाकिस्तान की एंट्री? जानें भारत के पास मौजूद उस ‘मास्टर रूल’ की पूरी सच्चाई

BRICS 2026: क्या पाकिस्तान BRICS समूह का हिस्सा बन पाएगा? नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को आयोजित हो रहे 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के बीच इस्लामाबाद की एंट्री की चर्चा फिर गर्म हो गई है. हालांकि, पाकिस्तान ने इस ग्रुप में शामिल होने की औपचारिक अर्जी तो दे रखी है, लेकिन उसकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा भारत है, क्योंकि BRICS का एक नियम भारत को इस मामले में सबसे ताकतवर बनाता है.

पाकिस्तान BRICS का सदस्य बनना चाहता है और उसने इसके लिए आवेदन भी किया है. लेकिन BRICS के सर्वसम्मति (Consensus) वाले नियम के कारण भारत के पास उसकी एंट्री रोकने की पूरी शक्ति है. चीन और रूस के समर्थन के बावजूद भारत की मंजूरी के बिना पाकिस्तान का ब्रिक्स में शामिल होना लगभग असंभव है.

‘कंसेंसस’ का नियम: क्यों भारत के पास है वीटो जैसी ताकत?

BRICS में नए देशों को शामिल करने के लिए कोई साधारण बहुमत या वोटिंग नहीं होती. यहां का सबसे पहला और मुख्य नियम है ‘कंसेंसस’ यानी सर्वसम्मति. इसका सीधा मतलब यह है कि अगर ग्रुप का एक भी पुराना सदस्य किसी देश के नाम पर सहमत नहीं है, तो उस देश को एंट्री नहीं मिल सकती. ऐसे में भले ही चीन और रूस पाकिस्तान के समर्थन में खड़े दिखें, लेकिन जब तक भारत की ओर से हरी झंडी नहीं मिलती, पाकिस्तान के लिए BRICS का दरवाजा पूरी तरह बंद ही रहेगा.

पाकिस्तान ने क्यों दी अर्जी और क्या हैं उसकी उम्मीदें?

पाकिस्तान ने 23 नवंबर 2023 को BRICS में शामिल होने के लिए आधिकारिक आवेदन दिया था. उसकी विदेश नीति का मुख्य मकसद बहुध्रुवीय आर्थिक दुनिया (Multipolar Economic Order) में अपनी जगह बनाना है. पाकिस्तान को उम्मीद है कि BRICS का सदस्य बनने से उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक पहचान मिलेगी, व्यापार-निवेश के रास्ते खुलेंगे और विकासशील देशों के साथ मिलकर अपनी बात रखने का मौका मिलेगा. हालांकि, BRICS कोई वित्तीय राहत कोष (Bailout Fund) नहीं है, इसलिए सदस्य बनने से भी पाकिस्तान की आर्थिक तंगी का रातों-रात समाधान नहीं होने वाला.

भारत क्यों नहीं देगा आसानी से रास्ता?

दूसरी तरफ, भारत का रुख इस मामले में एकदम स्पष्ट है. नई दिल्ली हमेशा से यह मानती आई है कि सीमा पार आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा को आर्थिक सहयोग से अलग नहीं देखा जा सकता. इसके अलावा, भारत नहीं चाहेगा कि BRICS का इस्तेमाल चीन और पाकिस्तान की जुगलबंदी अपने क्षेत्रीय एजेंडे को साधने के लिए करे. भारत की रणनीति यह भी हो सकती है कि फिलहाल नए सदस्यों को जोड़ने के बजाय BRICS के मौजूदा ढांचे को मजबूत किया जाए. ऐसे में इस्लामाबाद के लिए केवल बीजिंग या मॉस्को से पैरवी कराना काफी नहीं होगा, जब तक कि भारत की आपत्तियों का समाधान नहीं हो जाता.

यह भी पढ़ें-ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन की अहम बैठक, द्विपक्षीय सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर मंथन

-भारत एक्सप्रेस

Prashant Kumar

CEO – Bharat Express Digital Chief Advisor to the Chairman & Managing Director and Editor-in-Chief Mr. Prashant Kumar is a digital, media and growth transformation leader with 18+ years of experience across strategy, technology, AI, marketing and business transformation, having worked with leading organisations including Amazon, IBM, Adidas and Tata Consumer Products. At Bharat Express, he leads digital transformation, audience growth, technology, partnerships, monetisation and new business initiatives to build a scalable, future-ready media ecosystem.

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