देश की राजनीति में एक बार फिर महिला आरक्षण बिल को लेकर बहस तेज हो गई है. संसद में चर्चा के साथ-साथ अब नेताओं के बयान भी माहौल को गर्म कर रहे हैं. एनडीए के कई सांसदों ने इस बिल को महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण से जुड़ा ऐतिहासिक कदम बताया है और विपक्ष पर इसे लेकर विरोध करने का आरोप लगाया है.
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इस मुद्दे पर साफ कहा कि महिला आरक्षण की मांग कोई नई नहीं है, बल्कि यह कई दशकों से उठती रही है. उनके मुताबिक महिलाओं को उनका हक देना बेहद जरूरी है. पासवान ने यह भी सवाल उठाया कि अलग-अलग समय पर अलग-अलग तर्क देकर आखिर क्यों महिलाओं को उनके अधिकारों से दूर रखा जाता रहा है. उन्होंने कहा कि कभी “आरक्षण के भीतर आरक्षण” का मुद्दा उठाया जाता है तो कभी सीटों की संख्या को लेकर बहस की जाती है. उनका कहना था कि जब बिल पहले ही पारित हो चुका है, तो अब उसके लागू होने के समय विरोध करना समझ से बाहर है.
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने भी इस बहस में अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि परिसीमन का विरोध करना सही नहीं है, क्योंकि इसी प्रक्रिया के बाद लोकसभा और विधानसभा सीटों में बढ़ोतरी संभव है. उनके अनुसार, परिसीमन के बाद ही महिलाओं को आरक्षण का वास्तविक लाभ मिलेगा और इससे प्रतिनिधित्व भी बढ़ेगा. अठावले ने यह भी कहा कि सभी सांसदों को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन बिल का विरोध करना महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ रुख माना जाएगा.
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने इसे ऐतिहासिक कानूनों में से एक बताया और सभी दलों से अपील की कि वे क्षेत्रीय और सामाजिक विभाजन से ऊपर उठकर सोचें. उन्होंने कहा कि देश की राजनीति को महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण के समर्थन में एकजुट होना चाहिए. दुबे ने यह भी याद दिलाया कि उन्हें उस दिन संसद में बोलने का मौका मिला था जब यह बिल पारित हुआ था.
इसी दौरान उन्होंने 16 अप्रैल को कांग्रेस के इतिहास में एक “काला दिन” बताते हुए बोफोर्स घोटाले का भी जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय स्वीडिश रेडियो की रिपोर्ट में कमीशन की बात सामने आई थी, लेकिन कांग्रेस ने इन सवालों को लंबे समय तक दबाने की कोशिश की.
भाजपा सांसद और अभिनेत्री हेमा मालिनी ने इस दिन को बेहद भावनात्मक बताया. उन्होंने कहा कि यह महिलाओं के सम्मान से जुड़ा एक अहम अवसर है और सभी को इसका समर्थन करना चाहिए. उनके मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में महिलाओं के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं और यह कदम उसी दिशा में एक और बड़ा प्रयास है.
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-भारत एक्सप्रेस
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