Yogi Factor Bengal Elections: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रैलियों ने न केवल भीड़ के रिकॉर्ड तोड़े हैं बल्कि टीएमसी के खेमे में बेचैनी भी बढ़ा दी है. शुभेंदु अधिकारी का उन्हें साष्टांग दंडवत प्रणाम करने वाला वीडियो वायरल होने के बाद यह साफ हो गया है कि बंगाल भाजपा के लिए योगी सिर्फ एक प्रचारक नहीं बल्कि ‘संकटमोचक’ की भूमिका में हैं. मालदा से लेकर मेदिनीपुर तक, योगी ने अपने ‘यूपी मॉडल’ को बंगाल की जनता के सामने विकल्प के रूप में पेश किया है, जिसने ममता बनर्जी की टेंशन बढ़ा दी है.
योगी आदित्यनाथ ने बंगाल की रैलियों में सीधा और कड़ा संदेश दिया है. उन्होंने यूपी की कानून-व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश भी गुंडागर्दी और तुष्टिकरण से त्रस्त था, लेकिन आज वहां ‘उपद्रव नहीं, उत्सव’ होता है. जॉयपुर की रैली में उन्होंने अपना चर्चित नारा दोहराया कि ना गौ माता को कटने देंगे, ना हिंदुओं को बंटेंगे. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जैसे यूपी में माफियाओं का इलाज किया गया है, बंगाल में भी वही ‘बुलडोजर फॉर्मूला’ लागू किया जाएगा.
चुनावी विश्लेषक योगी आदित्यनाथ के पुराने स्ट्राइक रेट को ममता दीदी के लिए सबसे बड़ा खतरा मान रहे हैं. इसके पीछे कुछ ठोस आंकड़े हैं:
बिहार का कमाल: पिछले बिहार चुनाव में योगी ने जिन 15 जिलों की 98 सीटों पर प्रचार किया, वहां एनडीए का स्ट्राइक रेट लगभग 80% रहा. सीमांचल जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में भी योगी मैजिक ने भाजपा को जीत दिलाई.
दिल्ली का असर: दिल्ली विधानसभा चुनाव में शाहीन बाग और दंगों के शोर के बीच योगी ने जिन इलाकों (मंगोलपुरी, शाहदरा, पटपड़गंज आदि) में रैलियां कीं, वहां भाजपा के प्रदर्शन में जबरदस्त सुधार देखा गया.
यही वजह है कि बंगाल में भी भाजपा ने उन्हें उन क्षेत्रों में उतारा है जहाँ ध्रुवीकरण और कानून-व्यवस्था बड़े मुद्दे हैं.
मेदिनीपुर में शुभेंदु अधिकारी द्वारा योगी आदित्यनाथ को साष्टांग प्रणाम करने की तस्वीर ने बंगाल की राजनीति में एक बड़ा संदेश दिया है. यह न केवल योगी के प्रति सम्मान है, बल्कि बंगाल के हिंदू मतदाताओं के बीच उनकी पैठ को भी दर्शाता है.
बाबरी मस्जिद, काबा और बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए अत्याचारों जैसे मुद्दों को उठाकर योगी ने उन मतदाताओं को गोलबंद करने की कोशिश की है, जो टीएमसी की ‘तुष्टिकरण’ की राजनीति से नाराज बताए जा रहे हैं.
योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता का आलम (Yogi Factor Bengal Elections) यह है कि उनकी रैलियों में लोग ‘बुलडोजर’ लेकर पहुँच रहे हैं. हालांकि, टीएमसी इसे बाहरी संस्कृति का प्रभाव बता रही है, लेकिन भीड़ का वोटों में तब्दील होना भाजपा के लिए जीत की कुंजी साबित हो सकता है. क्या दिल्ली और बिहार की तरह बंगाल में भी योगी का स्ट्राइक रेट भाजपा को सत्ता की दहलीज तक ले जाएगा? इसका फैसला 4 मई को चुनावी नतीजों के साथ होगा, लेकिन फिलहाल ‘दबदबा’ तो योगी का ही दिख रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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