कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के भीतर चल रही खींचतान और सत्ता संतुलन की चर्चाओं के बीच पार्टी आलाकमान अब 1960 के दशक के मशहूर कामराज मॉडल के तहत मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल की तैयारी में दिखाई दे रही है. सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार दोनों ने ही मंत्रियों के प्रदर्शन को लेकर पार्टी नेतृत्व को रिपोर्ट सौंपी है. इसके आधार पर आने वाले हफ्तों में राज्य मंत्रिमंडल में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.
2023 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 135 सीटें जीतकर 1989 के बाद का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था. सत्ता में शानदार वापसी के बावजूद पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर असमंजस बना रहा. सूत्रों के अनुसार, पहले से चर्चा थी कि ढाई साल का फॉर्मूला अपनाया जा सकता है, यानी सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार में से हर एक को आधा-आधा कार्यकाल मिले.
हालाँकि, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कई मौकों पर साफ किया कि वे पूरा पाँच साल का कार्यकाल पूरा करना चाहते हैं. वहीं, डी.के. शिवकुमार के समर्थक इस फॉर्मूले की याद दिलाते रहे हैं.
कामराज मॉडल का नाम 1963 में तत्कालीन कांग्रेस नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के. कामराज से जुड़ा है. इसके तहत कई वरिष्ठ मंत्रियों को सरकार से हटाकर संगठन में भेजा गया था, ताकि नए और युवा नेताओं को शासन का अनुभव मिल सके तथा पुराने नेताओं की राजनीतिक ऊर्जा संगठन के विस्तार में लगे.
कांग्रेस अब इसी विचार को दोबारा जीवित करने की तैयारी में है, यानी पुराने अनुभवी नेताओं को संगठन में नई भूमिका और युवाओं को शासन में अवसर.
सूत्रों के अनुसार, कर्नाटक मंत्रिमंडल से कम से कम एक दर्जन वरिष्ठ मंत्रियों को हटाया जा सकता है. इनमें कई वरिष्ठ नामों, जैसे दिनेश गुंडू राव, एच.सी. महादेवप्पा, शिवानंद पाटिल, शरणबसप्पा दर्शनपुर, रहीम खान, एस.एस. मल्लिकार्जुन, थिम्मापुर रामप्पा बलप्पा, के. वेंकटेश, तंगदागी शिवराज संगप्पा आदि पर चर्चा चल रही है.
इनकी जगह ऐसे नए चेहरे लाए जा सकते हैं जो विभिन्न जातियों, समुदायों और क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हों और जिनकी छवि कार्यकर्ता-आधारित या युवा नेतृत्व की हो. कांग्रेस संगठन में एनएसयूआई से निकले सलीम अहमद जैसे नेताओं को शामिल किए जाने की अटकलें हैं. पार्टी युवा और नए चेहरों को आगे लाकर “नई कांग्रेस” का संदेश देना चाहती है. दूसरी ओर, वरिष्ठ नेताओं को संगठन में भेजकर उन्हें नाराज़ नहीं करना भी चुनौती है.
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस फेरबदल से राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे यह संदेश देना चाहते हैं कि पार्टी केवल सत्ता तक सीमित नहीं, बल्कि संगठन के विस्तार और नेतृत्व निर्माण पर भी ध्यान दे रही है. राहुल गांधी आने वाले दिनों में कर्नाटक का दौरा करने वाले हैं. इसी दौरान वे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ बैठक कर फेरबदल की अंतिम रूपरेखा पर चर्चा कर सकते हैं.
इस बीच, कांग्रेस महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने विधायकों से फीडबैक लेकर पार्टी आलाकमान को रिपोर्ट सौंप दी है. माना जा रहा है कि अंतिम निर्णय इसी फीडबैक और परफॉर्मेंस रिपोर्ट के आधार पर होगा.
कर्नाटक में प्रस्तावित कामराज मॉडल केवल एक मंत्रिमंडलीय फेरबदल नहीं, बल्कि कांग्रेस की संगठनात्मक पुनर्निर्माण रणनीति का हिस्सा है . कांग्रेस यदि इस मॉडल को संतुलित तरीके से लागू कर पाती है, तो यह न केवल कर्नाटक में बल्कि अन्य राज्यों में भी संगठन को नई दिशा देने वाला कदम साबित हो सकता है. परंतु यदि इसमें असंतुलन या गुटीय राजनीति हावी रही, तो यह पार्टी के लिए उलटा भी पड़ सकता है.
ये भी पढ़ें: LoP अबसेंट हैं! ‘वोट चोर’ का नारा लगाकर खुद बिहार छोड़ गए राहुल गांधी, लोकेशन क्या है?
-भारत एक्सप्रेस
Gwalior News: एशियन गेम्स में भारतीय महिला हॉकी टीम ने चीन को 1-0 से हराकर…
Premanand Maharaj Ashram Missing Girl: नोएडा की 35 वर्षीय MBA पास युवती विभा 15 अगस्त…
PM Modi Haryana BJP Meeting: हरियाणा सीएम नायब सिंह सैनी, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अर्चना गुप्ता…
Gajendra Singh Shekhawat: केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के जन्मदिन पर भाजपा सांसद विनोद तावड़े…
रिकॉर्ड ऊंचाई से नीचे आने के बाद सोने और चांदी की कीमतों में लगातार सुस्ती…
Diwali Gift UP Teachers: यूपी के परिषदीय स्कूलों में 2016 से अटका शिक्षकों का प्रमोशन…