नवीनतम

दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव खर्च के सही हिसाब का खुलासा न करने को भ्रष्टाचार नहीं माना, दो याचिकाएं खारिज

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई उम्मीदवार चुनाव खर्च का उचित हिसाब-किताब नहीं रखता है या अपने किए गए खर्च का सही-सही खुलासा नहीं करता है, तो यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123 के तहत भ्रष्ट आचरण नहीं माना जाएगा. न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने उक्त टिप्पणी करते हुए राजेंद्र नगर विधानसभा क्षेत्र से दिल्ली विधानसभा उपचुनाव, 2022 में आप उम्मीदवार दुर्गेश पाठक की जीत को चुनौती देने वाली रमेश कुमार खत्री की चुनाव याचिका को खारिज कर दिया. न्यायमूर्ति पुष्करणा ने पाठक की चुनाव में जीत को चुनौती देने वाले मोहिंदर सिंह की एक अन्य चुनाव याचिका को भी खारिज कर दिया.

खर्च का सही हिसाब न रखने के आरोपों को खारिज किया

खत्री ने कहा था कि पाठक को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8(A) के अनुसार छह साल के लिए विधानसभा चुनाव लड़ने से रोक दिया जाए. क्योंकि पाठक ने दैनिक व्यय रजिस्टर में मनगढ़ंत खर्च दिखाया था. इसके अलावा पाठक ने अपने चुनाव व्यय रजिस्टर में जलपान, होर्डिंग, बैनर, पंपलेट, झाड़ू आदि पर किए गए खर्च का सही हिसाब दर्ज नहीं किया था. याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि खत्री के लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही माने भी जाएं, तो भी वे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 100(1)(B) के तहत पाठक के चुनाव को रद्द करने का आधार नहीं बनेंगे.

यदि याचिका में उचित लेखा-जोखा न रखने के आरोप सिद्ध भी हो जाएं तो भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार यह भ्रष्ट आचरण नहीं माना जाएगा. इस तरह से याचिका में कार्रवाई का कोई कारण नहीं बताया गया है. उसने यह भी कहा कि खत्री की चुनाव याचिका में ऐसा कोई बात नहीं है जिससे यह पता चले कि पाठक ने चुनाव के लिए निर्धारित सीमा से अधिक राशि खर्च की है या सही लेखा-जोखा न देने के कारण चुनाव का परिणाम भौतिक रूप से प्रभावित हुआ है.

मोहिंदर सिंह की चुनाव याचिका  खारिज

न्यायमूर्ति पुष्करणा ने पाठक की चुनाव में जीत को चुनौती देने वाले मोहिंदर सिंह की एक अन्य चुनाव याचिका को भी खारिज कर दिया. सिंह ने कहा था कि पाठक ने अपने पति या पत्नी का नाम छिपाकर एक दोषपूर्ण नामांकन पत्र दाखिल किया था. उनके शिकायत के बावजूद रिटर्निग अधिकारी ने कोई कार्रवाई नहीं की. साथ ही पाठक ने सौ रुपए देकर बच्चों से चुनाव प्रचार कराया था. याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि नामांकन पत्र में पति/पत्नी के नाम के सामने वाले कॉलम में पाठक ने लागू नहीं होता लिखा था.

रिकॉर्ड में ऐसा कोई तथ्य नहीं है जिससे यह पता चले कि पाठक ने कोई जानकारी छिपाई है. उसने यह भी कहा कि उस तिथि, समय या स्थान के बारे में कोई विवरण नहीं है, जहां बच्चों को कथित तौर पर पाठक के पर्चे बांटते हुए देखा गया था. इस तरह से याचिका कार्रवाई का कारण बताने में विफल है.

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

राहुल जी! रास्ते और दुकानें बंद हैं, लोग खरीदारी कहां करेंगे? रामलीला मैदान रैली से ठप हुआ दिल्ली का व्यापार

Ramlila Maidan Rally: सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि हमें भाजपा का एजेंट बताया…

19 minutes ago

Ujjain Hotel Tragedy: जहरीली गैस से 4 कर्मचारियों की मौत, परिजनों का 1 करोड़ रुपये मुआवजे पर हंगामा

MP News: उज्जैन के होटल श्रीगंगा में जहरीली गैस से 4 कर्मचारियों की मौत के…

48 minutes ago

‘देश में दूसरा, दुनिया में दूसरा’ चंडीगढ़ पुलिस के क्विक रिस्पॉन्स टाइम पर फिदा हुए गृह मंत्री अमित शाह

Amit Shah: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रविवार को चंडीगढ़ पुलिस के 60वें स्थापना दिवस…

54 minutes ago

सरेंडर के बाद भी नहीं छोड़ा नक्सलियों का साथ! दो महिला नक्सली 21 लाख रुपये के साथ गिरफ्तार

Gariaband Naxal: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में पुलिस ने दो आत्मसमर्पित महिला नक्सलियों और उनके एक…

56 minutes ago

दिवाली से पहले गोरखपुर को योगी गिफ्ट, 1,663 करोड़ की 88 परियोजनाओं से बदलेगी शहर की सूरत

Yogi Adityanath: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने गृह जनपद गोरखपुर को दिवाली से ठीक पहले…

1 hour ago